माघ मेला में श्रद्धालुओं के लिए दूसरा महत्वपूर्ण स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन पर्व पर किया जाएगा। मकर संक्रांति को सभी संक्रांतियों में विशेष माना जाता है, क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसे देवताओं का शुभ समय कहा गया है। ऐसे में प्रयागराज में माघ मेले के दौरान किया गया स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति पर क्यों खास है माघ मेले का स्नान?
माघ मेला कुल 45 दिनों तक चलता है और मकर संक्रांति इसका दूसरा प्रमुख स्नान पर्व है। इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन स्नान और दान का महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन त्रिवेणी संगम में गंगा स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पौष पूर्णिमा के पहले स्नान में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई थी, जबकि मकर संक्रांति पर करीब 1 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने का अनुमान है।
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त
पुण्य काल व महापुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक
इसी समय दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का महत्व
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस बार मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा।
आस्था और आध्यात्म का महासंगम
जब मकर संक्रांति जैसा पावन पर्व माघ मेले के साथ आता है, तो यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहता, बल्कि आस्था, तप और आत्मिक शुद्धि का पर्व बन जाता है। जैसे सूर्य उत्तरायण होकर अंधकार को पीछे छोड़ता है, वैसे ही श्रद्धालु संगम में स्नान कर अपने जीवन के कष्ट और नकारात्मकता दूर होने की कामना करते हैं।





