अधिकमास 2026 को लेकर श्रद्धालुओं के बीच जिज्ञासा बढ़ गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अधिकमास लगने वाला है, जिससे यह साल 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है और इसे धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जाता है।
2026 में अधिकमास कब से कब तक?
वैदिक पंचांग के मुताबिक, 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक अधिकमास रहेगा। यह पूरा समय जप, तप, ध्यान और भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
अधिकमास क्यों लगता है?
हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा—दोनों की गति पर आधारित होता है। जब सूर्य की संक्रांति एक चंद्र मास में नहीं आती, तब पंचांग के संतुलन के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है—इसी को अधिकमास कहा जाता है। यह सामान्यतः हर ढाई से तीन साल में आता है। इससे पहले अधिकमास 2023 में लगा था।
अधिकमास के नियम
मांगलिक और शुभ संस्कार वर्जित रहते हैं
पूजा, जप, तप, ध्यान और व्रत श्रेष्ठ माने जाते हैं
सांसारिक आयोजनों से विराम लेकर आध्यात्मिक साधना पर जोर दिया जाता है
मान्यता है कि इस मास में की गई साधना का फल कई गुना मिलता है
अधिकमास का धार्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में अधिकमास को पवित्र माना गया है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित मास कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु मंत्रों का जाप, कथा श्रवण और दान–पुण्य करने से साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह समय आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।





