नई दिल्ली। भारतीय रुपये की कमजोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 90.87 पर पहुंच गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 90.77 से 90.87 प्रति डॉलर के दायरे में उतार-चढ़ाव करता रहा। इससे एक दिन पहले सोमवार को भी रुपया 90.78 पर बंद हुआ था, जो उस समय का सबसे निचला स्तर था।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक फिलहाल भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े ठोस संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। जब तक इस पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, डॉलर इंडेक्स में मामूली कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।
इस बीच शेयर बाजार की कमजोरी ने भी रुपये की चाल को प्रभावित किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 364 अंक गिरकर 84,849 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 106 अंक टूटकर 25,920 के आसपास कारोबार करता दिखा।
कच्चे तेल के मोर्चे पर राहत जरूर देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 0.61 प्रतिशत गिरकर 60.19 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिससे आयात लागत में कुछ राहत की उम्मीद है। बावजूद इसके, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी है। बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को एफआईआई ने करीब 1,468 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती और व्यापार समझौते पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक रुपये की कमजोरी बनी रह सकती है।





