मध्य प्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में यह सामने आया कि उन्होंने जाली दस्तावेजों के आधार पर IAS पदोन्नति प्राप्त की थी और कई मौकों पर सेवा नियमों का उल्लंघन किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर वर्मा को उनके सभी पदों से हटा दिया गया है और अब राज्य ने उनकी बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है।
विभागीय जांच के दौरान पता चला कि वर्मा ने फर्जी दस्तावेजों और मनगढ़ंत आदेशों के माध्यम से पदोन्नति हासिल की। साथ ही, कारण बताओ नोटिस पर उनका जवाब भी असंतोषजनक पाया गया। जांच अधिकारियों ने यह भी दर्ज किया कि वे कार्रवाई के दौरान भी अभद्र और भड़काऊ बयान देते रहे, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
हाल के महीनों में वर्मा कई विवादों में घिरे रहे हैं। इंदौर की अदालतों से मिली रिपोर्टों में आरोप है कि उन्होंने एक न्यायाधीश के साथ मिलकर घरेलू मामले में मनगढ़ंत फैसले तैयार करवाए, ताकि उनकी पदोन्नति का रास्ता साफ हो सके। इन आरोपों से जुड़े केस अभी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
विवादित बयान भी उनकी परेशानी का बड़ा कारण बना। 23 नवंबर 2025 को एक कार्यक्रम में दिए गए कथित तौर पर जातिवादी टिप्पणी—जिसमें उन्होंने कहा था कि “रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे”—के बाद कई सामाजिक संगठनों और ब्राह्मण समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सरकार ने इस टिप्पणी को “गंभीर दुर्व्यवहार” और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना।
इन घटनाओं के बाद कृषि विभाग ने वर्मा को उप सचिव पद से हटा कर उन्हें GAD पूल में भेज दिया है, जहां उनके पास कोई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है, जो राज्य द्वारा भेजे गए बर्खास्तगी प्रस्ताव पर निर्णय करेगी।





