मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले शिशुओं के लिए एक नई पहल की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ स्थापित करने की घोषणा की है। इस कदम को प्राचीन भारतीय परंपराओं और आधुनिक चिकित्सा के मेल के रूप में देखा जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य गर्भ में पल रहे शिशु को केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त बनाना है। हिंदू धर्म में गर्भ संस्कार को विशेष महत्व दिया गया है।
क्या है गर्भ संस्कार?
गर्भ संस्कार वह प्रक्रिया है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान मां और उसके अजन्मे शिशु के लिए अच्छे संस्कार और शिक्षा का माध्यम होता है। गर्भ में पल रहा बच्चा गर्भ में ही सीखने में सक्षम हो जाता है।
गर्भ संस्कार का महत्व
गर्भ संस्कार के जरिए शिशु मानवीय संबंधों को समझता है। और समाज में बेहतर संवाद, संबंध बना सकता है।
मां की भूमिका सबसे अहम
गर्भावस्था के दौरान मां को खुद को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तौर पर अच्छी स्थिति में रखाना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु पर अच्छा प्रभाव पड़े। शिशु सुशील, बुद्धीमान, और संतुलित व्यक्तित्व विकसित कर सके।
माता-पिता क्या करें?
– गर्भ में पल रहे शिशु से सकारात्मक संवाद करें
– संतुलित और पौष्टिक आहार लें
– मधुर संगीत और सकारात्मक भाषा से शिशु को परिचित कराएं
– योग, प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें
गर्भ संस्कार के कई उदाहरण भी मिलते हैं
पौराणिक कथाओं में गर्भ संस्कार के कई उदाहरण मिलते हैं। अभिमन्यु मां की कोख में ही चक्रव्यूह तोड़ना सीख गया था। वहीं प्रह्लाद भी भगवान विष्णु के भक्त इसलिए थे क्योंकि जब वो अपनी माँ की कोख में थे, तो उनकी माँ भगवान विष्णु की रोज पूजा करती थीं.
सरकार की यह पहल मातृत्व देखभाल को एक नई दिशा देने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है।




