रायपुर। राजधानी के मरीन ड्राइव में नगर निगम की नई पार्किंग व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। निगम ने दावा किया था कि सुबह-शाम टहलने आने वालों से शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन अब आरोप है कि छूट देने का आधार लोगों का पहनावा बना दिया गया है।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों के मुताबिक, जो लोग लोअर और टी-शर्ट में आते हैं, उन्हें मॉर्निंग/इवनिंग वॉकर मानकर पार्किंग फीस नहीं ली जा रही। वहीं जींस, फॉर्मल या अन्य कपड़ों में आने वालों को ‘मनोरंजन’ की श्रेणी में रखकर शुल्क वसूला जा रहा है। इस तरीके को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और कई बार बहस की स्थिति भी बन रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था कर्मचारियों के विवेक पर निर्भर दिखती है। आरोप है कि विरोध करने पर कुछ मामलों में शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि शांत रहने वालों से पर्ची काट दी जाती है। इससे नियमों की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
विवाद के चलते कई वाहन चालक अधिकृत पार्किंग से बचते हुए आसपास की सड़कों और गलियों में वाहन खड़ा कर रहे हैं। कुछ लोग शुल्क मांगे जाने पर गाड़ी खड़ी किए बिना ही लौट गए।
पार्किंग शुल्क दोपहर 12 बजे से रात 11 बजे तक वसूला जा रहा है। शिफ्ट के हिसाब से पांच कर्मचारी तैनात रहते हैं और प्रतिदिन करीब तीन से पांच हजार रुपये दैनिक आय मिलने का दावा किया जा रहा है।
राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार भारती बागल ने कहा है कि एक माह तक व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी और आगे टेंडर प्रक्रिया के जरिए निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल जनसुविधा के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था ‘ड्रेस कोड’ आधारित शुल्क को लेकर चर्चा और विवाद का विषय बनी हुई है।





