अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी अब उल्टा असर दिखा रही है. ट्रंप ने हुवावे जैसी चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिकी टेक जायंट्स को मजबूत करने की कोशिश की, वहीं अब यूरोपीय देश और अन्य राष्ट्र अपनी डिजिटल संप्रभुता (डिजिटल सॉवरेनिटी) की रक्षा के लिए अमेरिकी कंपनियों पर निर्भरता घटा रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण फ्रांस का हालिया ऐलान है. वहां सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट टीम्स (Microsoft Teams) और ज़ूम (Zoom) जैसे अमेरिकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म्स को सरकारी विभागों से हटाने का फैसला किया है. इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा. इनकी जगह अपने घरेलू विजियो (Visio) प्लेटफॉर्म को अपनाया जाएगा. यह कदम न केवल सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से प्रेरित है, बल्कि ट्रंप की भू-राजनीतिक अस्थिरता वाली नीतियों का सीधा जवाब भी है. कुल मिलाकर अमेरिकी टेक कंपनियों की परेशानी बढ़ रही है.
फ्रांस की सरकार ने 27 जनवरी 2026 को घोषणा की कि 2027 तक सभी सरकारी विभागों में अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा. विजियो को मुख्य टूल बनाया जाएगा, जिसे इंटरमिनिस्ट्रियल डिजिटल डायरेक्टोरेट (DINUM) द्वारा विकसित किया गया है. यह प्लेटफॉर्म पहले से ही पायलट परीक्षण किया जा चुका है और फिलहाल 40,000 यूजर्स को सपोर्ट करता है. फ्रांस के मुताबिक, यह बदलाव सुरक्षा और गोपनीयता की रक्षा करेगा, क्योंकि अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स पर डेटा अमेरिकी कानूनों के अधीन रहता है, जो विदेशी सरकारों के लिए खतरा बन सकता है.




