मध्यप्रदेश

इंदौर में पानी जनित बीमारी महामारी घोषित, 15 से ज्यादा मौतें, नर्मदा जल सप्लाई बंद

मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी से फैलने वाली बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। स्वास्थ्य प्रशासन ने भगीरथपुरा क्षेत्र में फैले संक्रमण को महामारी घोषित कर दिया है। अब तक इस बीमारी से 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद केंद्र और राज्य सरकार की विशेष विशेषज्ञ टीमें मौके पर जांच और नियंत्रण के लिए तैनात की गई हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसनानी ने बताया कि किसी एक इलाके में सामान्य से कहीं ज्यादा मामले सामने आने पर उसे महामारी की श्रेणी में रखा जाता है। विशेषज्ञ टीमें सर्वे और लैब रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाने में जुटी हैं कि दूषित पानी का स्रोत एक है या कई जगहों से संक्रमण फैल रहा है।

जांच में सामने आया है कि डायरिया फैलने की मुख्य वजह पानी की पाइपलाइन में लीकेज है, जिससे गंदगी सप्लाई लाइन में मिल गई। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें देशभर से आए संक्रामक रोग और महामारी विज्ञान के विशेषज्ञ शामिल हुए।

कोलकाता से आई वैज्ञानिक टीमों ने प्रभावित इलाकों से पानी के सैंपल लेकर बैक्टीरिया की पहचान की। प्रशासन ने एहतियातन नर्मदा नदी से होने वाली पानी की सप्लाई रोक दी है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने और पाइपलाइन पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने तक यह सप्लाई बहाल नहीं की जाएगी।

स्थिति को काबू में रखने के लिए भगीरथपुरा इलाके को 32 हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में अलग-अलग टीमें निगरानी और सफाई का काम कर रही हैं। सरकारी और निजी बोरवेल में क्लोरीन डालना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही लोगों को बेसमेंट के पानी के टैंकों को खाली कर साफ और कीटाणुरहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का कोई मामला सामने नहीं आया है और इससे जुड़ी अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। प्रभावित इलाकों में टैंकरों से साफ पेयजल पहुंचाया जा रहा है और स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां वितरित कर रहे हैं।

बीमार लोगों का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जा रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में दवाएं और जरूरी इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।

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