छत्तीसगढ़

रेखा सिंह करुणा, सेवा और हरियाली की रहीं प्रेरणा

रायपुर। स्वर्गीय श्रीमती रेखा सिंह की पुण्य स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा केवल शोक का अवसर नहीं थी, बल्कि एक ऐसे जीवन का शांत और गरिमामय स्मरण थी, जिसने अपने कर्मों से समाज और प्रकृति दोनों को समृद्ध किया। प्रार्थना सभा में उपस्थित लोगों ने उस शांति और आत्मीयता को महसूस किया, जो उनके व्यक्तित्व की सहज पहचान थी। प्रार्थना सभा में यह उदगार छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डा. रमन सिंह ने व्यक्त किया।

डा. रमन ने स्वर्गीय रेखा सिंह के व्यक्तित्व, उनकी सेवा भावना और समाज के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा उनके कार्यों को प्रेरणास्रोत बताया।
इस अवसर पर भास्कर दूत के प्रधान संपादक दुष्यंत दास ने भी शिवराज सिंह परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की तथा स्वर्गीय रेखा सिंह के करुणा, सेवा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि रेखा सिंह एक प्रसन्नचित्त, सरल और सेवा-भाव से परिपूर्ण व्यक्तित्व थीं। वे मानती थीं कि सच्चा परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि कर्म से आता है। इसी विश्वास के साथ उन्होंने अपने जीवन को समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित किया।

प्रार्थना सभा में अन्य लोगों ने कहा कि रायपुर में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान स्थायी और प्रत्यक्ष रहा। उन्होंने न केवल पेड़ों पर जागरूकता से जुड़ी गतिविधियाँ कीं, बल्कि स्वयं पेड़ लगाकर हरियाली बढ़ाने का कार्य किया। उनके लिए पेड़ लगाना भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प था—एक ऐसा प्रयास, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायिनी विरासत छोड़ता है।महिला सशक्तिकरण उनके कार्यों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा। उन्होंने विभिन्न पृष्ठभूमि की महिलाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महिलाओं को नए कौशल सिखाने, धैर्य, सहनशीलता और सहयोग जैसे मानवीय गुणों को जीवन में अपनाने की शिक्षा दी।
उनकी उल्लेखनीय पहल में महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए सिलाई मशीन जैसी मशीनरी का वितरण भी शामिल रहा। इससे महिलाओं को न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना भी विकसित हुई।

प्रार्थना सभा में उपस्थित लोगों ने केवल उन्हें याद ही नहीं किया, बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनके विचारों को अपने भीतर महसूस किया। साझा की गई स्मृतियों और व्यक्त किए गए कृतज्ञ भावों में उनकी उपस्थिति स्पष्ट झलकती रही।

रेखा सिंह भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनकी सेवा, उनके संस्कार और उनकी करुणा आज भी उन सभी लोगों के जीवन में जीवित हैं, जिन्हें उन्होंने मार्गदर्शन और सहारा दिया। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सच्ची सेवा मौन होती है, किंतु उसका प्रभाव चिरस्थायी होता है।
उनकी स्मृति को नमन करते हुए हम एक ऐसे जीवन का सम्मान करते हैं, जो करुणा, साहस और मानवता की भावना से ओतप्रोत रहा।

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