वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता साबित करने की कोशिश में जुटे रहते हैं, लेकिन अमेरिकी एक्सपर्ट इस दावे से सहमत नहीं हैं। अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर का कहना है कि अमेरिका भले ही आज भी सबसे शक्तिशाली देश हो, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर ट्रंप दुनिया के सबसे मजबूत वर्ल्ड लीडर नहीं हैं।
दावोस में एक इंटरव्यू के दौरान ब्रेमर ने साफ कहा कि मौजूदा दौर ट्रंप का नहीं है। उनके मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समय दुनिया के सबसे ताकतवर नेता हैं। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग को न तो मिडटर्म चुनावों का दबाव झेलना पड़ता है और न ही स्वतंत्र न्यायपालिका जैसी सीमाएं हैं। वहीं ट्रंप का कार्यकाल सीमित है और वे कुछ वर्षों बाद सत्ता में नहीं रहेंगे, जबकि शी जिनपिंग लंबे समय तक फैसले लागू कर सकते हैं।
ब्रेमर ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ट्रंप से बेहतर स्थिति में बताया। उन्होंने कहा कि मोदी का लंबा कार्यकाल उन्हें सुधारों को ज्यादा मजबूती और आक्रामकता के साथ आगे बढ़ाने का अवसर देता है। लंबे समय तक सत्ता में रहने से मोदी कई यूरोपीय नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना में अधिक प्रभावी फैसले ले पाते हैं।
अमेरिकी एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि ट्रंप के कई फैसले उनके कार्यकाल के बाद पलटे जा सकते हैं, जैसा कि उन्होंने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन की नीतियों के साथ किया था। अमेरिका में हर चार साल में सत्ता परिवर्तन से नीतियों की निरंतरता प्रभावित होती है, जिससे बड़े नतीजे सामने आने में समय लगता है।
ब्रेमर का यह आकलन ऐसे समय में आया है जब ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी भी असहज महसूस कर रहे हैं। ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और नाटो सहयोगियों से बढ़ते तनाव के बीच, ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका पर वैश्विक भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।





