दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम नगपुरा में आयोजित शिवकथा के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय शिवकथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा प्रस्तुत कथा के दूसरे दिन पंडाल हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। उन्होंने भगवान शिव के संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य ईश्वर की शरण में जाना है।
कथा के दौरान पं. मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव कब, कहां और किस रूप में दर्शन देंगे, यह वही जानते हैं। भक्त का कर्तव्य है कि वह निष्काम भाव से श्रद्धा और विश्वास के साथ भक्ति करे। सच्चे मन से की गई भक्ति से महादेव स्वयं भक्त के जीवन में प्रवेश कर उसके कष्ट दूर करते हैं।
घर से रुकेगा अपराध, संस्कार से बदलेगा समाज
कथा में सामाजिक सरोकारों पर भी जोर दिया गया। पं. मिश्रा ने कहा कि यदि परिवार में, विशेषकर माताएं, सही शिक्षा और संस्कार का वातावरण बनाएं तो अपराध पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे रिश्तों में दूरी बढ़ रही है और पारिवारिक संवाद कमजोर हो रहा है।
नगपुरा की धरती शिवभक्ति में सराबोर
भगवान तीर्थंकर पाश्र्वनाथ की पावन भूमि नगपुरा शिवभक्ति के रंग में रंगी नजर आई। श्रद्धालुओं ने कथा से प्रेरणा लेकर सत्य, करुणा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पं. मिश्रा ने कहा कि कथा सुनना तभी सार्थक है जब उसे आचरण में उतारा जाए—सिर्फ मंदिर जाना या कथा सुनना पर्याप्त नहीं, व्यवहार में परिवर्तन ही सच्ची भक्ति है।
संस्कारों से बच्चों का निर्माण
उन्होंने परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पति-पत्नी का संबंध आध्यात्मिक यात्रा का सहयात्री होता है। घर में संवाद, संयम और संस्कार का वातावरण होगा तो समाज स्वतः सही दिशा में आगे बढ़ेगा। माताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को शब्दों से नहीं, बल्कि संस्कारों से गढ़ा जाता है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए दुर्ग पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और लगभग 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, जिससे श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण माहौल में कथा का आनंद लिया।





