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कच्चे तेल में आया उबाल….सरकार ने बढ़ाया विंडफॉल टैक्स….जानिए प्रति टन के हिसाब से कितना बढ़ा भाव

केंद्र सरकार ने 3 अप्रैल को कच्चे पेट्रोलियम पर विंडफॉल टैक्स को 4,900 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 6,800 रुपये प्रति टन कर दिया. नई दरें 4 अप्रैल से प्रभावी हो गई हैं. यह कर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में लगाया जाता है. इससे पहले, सरकार ने 15 मार्च को कच्चे पेट्रोलियम पर विंडफॉल टैक्स 4,600 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 4,900 रुपये प्रति टन कर दिया था.

डीजल, पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन ईंधन के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) शून्य पर जारी रहेगा. पिछले 2 सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े कर दरों की समीक्षा की जाती है.

सरकार ने क्यों बढ़ाया विंडफॉल टैक्स
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी होने के कारण सरकार ने कच्चे पेट्रोलियम पर अप्रत्याशित करों में वृद्धि की है. 3 अप्रैल को बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई में संभावित बाधा की चिंताओं के बीच तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही. 4 अप्रैल को सुबह 6 बजे क्रूड 85.48 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा. वहीं, ब्रेंट क्रूड 89.47 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.

क्या होता है विंडफॉल टैक्स
विंडफॉल टैक्स, तब लगाया जाता है जब किसी इंडस्ट्री को सामान्य से ज्यादा व अप्रत्याशित मुनाफा होता है. खासकर, इसकी वजह कोई असामान्य घटना हो, जिसके कारण कंपनियों को अच्छा फायदा पहुंचे. जैसे- युद्ध के समय अचानक से पेट्रोल के भाव बढ़ जाएं तो ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों को काफी फायदा होता है. भारत में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर सबसे पहले जुलाई 2002 में विंडफॉल टैक्स लगाया गया था.

अगर ग्लोबल बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बढ़ जाती हैं तो घरेलू कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है. वहीं, यदि उत्पाद में कमी (या मार्जिन) 20 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बढ़ जाती है, तो डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात पर लेवी लगती है.

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