मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने फोन पर पश्चिम एशिया की स्थिति और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, “मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति का फोन आया। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इस बात पर सहमत हुए कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता को तत्काल बहाल करने की जरूरत है।”
उन्होंने आगे कहा कि “दोनों देश इस क्षेत्र और उससे बाहर भी शांति- स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपना घनिष्ठ सहयोग जारी रखेंगे।”
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज?
फिलहाल वैश्विक राजनीति का सबसे प्रमुख केंद्र बना हॉर्मुज जलमार्ग पर ईरान की तरफ से प्रतिबंध लगाने के बाद से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। इसने वैश्विक स्तर पर विकास की रफ्तार पर अनुमानित असर डाला है। ईरान के अलावा अमेरिका की तरफ से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने जैसा कदम उठाकर भी चिंता पैदा कर दी है।
भारत पर असर
भारत इस रास्ते पर अपने एनर्जी इंपोर्ट को लेकर निर्भर है। भारत का करीबन 85 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से आता है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी खाड़ी देशों से आयात किया जाने वाला तेल है। भारत दुनिया का वैसे भी तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हॉर्मुज में बनी विवादित स्थिति और मीडिल ईस्ट की जंग ने भारत के सप्लाई चैन को प्रभावित किया है।
इसके अलावा रूस से तेल खरीद को लेकर भी स्थिति जटिल बनी हुई है, क्योंकि अमेरिका की अस्थायी छूट खत्म हो चुकी है। यह छूट रूस से तेल खरीदने को लेकर दी गई थी। अगर भारत रूस से ज्यादा मात्रा में तेल खरीदता है, तो उससे अमेरिका से रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। फिलहाल अमेरिका और भारत में ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत जारी है।





