छत्तीसगढ़

शराब घोटाला केस में कवासी लखमा को अंतरिम राहत, जेल से रिहा होने पर गोंडी नृत्य से हुआ स्वागत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी है। इसके बाद बुधवार को उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। लखमा करीब एक साल से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे थे। इस प्रकरण में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया था।

जेल से रिहाई की खबर फैलते ही जेल परिसर के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई। कवासी लखमा की पत्नी बुधरी लखमा स्वयं उन्हें लेने जेल पहुंचीं। पति के बाहर आते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। समर्थकों का कहना था कि बुधरी को आखिरी वक्त तक यकीन नहीं हो रहा था कि बुधवार को लखमा जेल से बाहर आ पाएंगे।

पारंपरिक अंदाज में हुआ स्वागत
लखमा की रिहाई को लेकर बस्तर से आए नृत्य दलों ने जेल के बाहर पारंपरिक गोंडी नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच समर्थकों ने खुशी जाहिर की। कोंटा विधानसभा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे थे। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए जेल रोड को वन-वे कर यातायात डायवर्ट किया गया।

इन शर्तों के साथ मिली अंतरिम जमानत
अंतरिम जमानत के तहत कवासी लखमा को सुनवाई पूरी होने तक छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर रहना होगा। उन्हें अपना पासपोर्ट संबंधित अदालत में जमा करना होगा और जहां भी वे निवास करेंगे, उसकी जानकारी कोर्ट को देनी होगी। जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर पूछताछ में सहयोग करना अनिवार्य रहेगा। वे केवल सुनवाई की तारीखों पर ही रायपुर आ सकेंगे।

विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए लेनी होगी विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति
कवासी लखमा कोंटा से विधायक हैं लेकिन आगामी बजट सत्र में शामिल होने के लिए उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति लेनी होगी। अध्यक्ष द्वारा आवेदन पर विचार करने के बद ही उन्हें सत्र में भाग लेने की अनुमति मिलेगी।

पत्नी का छलका दर्द
मीडिया से बातचीत में पत्नी बुधरी लखमा ने बताया कि पति की गिरफ्तारी के बाद वे लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहीं। उन्होंने कहा कि जेल में पति को बंद देखकर मन घबराता था और इसी तनाव के कारण उन्होंने ठीक से खाना भी नहीं खाया, जिससे उनका वजन कम हो गया।

ईडी के गंभीर आरोप बरकरार
ईडी का आरोप है कि कवासी लखमा शराब घोटाला सिंडिकेट की अहम कड़ी थे और उनके निर्देश पर पूरा नेटवर्क काम करता था। एजेंसी का दावा है कि शराब नीति में बदलाव और एफएल-10 लाइसेंस की शुरुआत में लखमा की महत्वपूर्ण भूमिका रही और उन्हें इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ मिला।

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