गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा दिवस की वर्षगांठ अयोध्या सहित पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल चतुर्थी, गुरु तत्व, सूर्य के उत्तरायण और शुभ योग में यह पावन दिवस मनाया जा रहा है, जिसने करोड़ों रामभक्तों की आस्था को नई ऊर्जा दी है।
प्राण प्रतिष्ठा का आध्यात्मिक अर्थ
प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है मूर्ति में प्राण तत्व का आवाहन। शास्त्रों में माना गया है कि जब तक वैदिक मंत्रों और विशेष अनुष्ठानों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती, तब तक मूर्ती केवल प्रतिमा होती है। लेकिन वैदिक मंत्रों और विशेष अनुष्ठानों से जब देवत्व का आवाहन किया जाता है, तब भगवान साक्षात विराजमान होते हैं। 22 जनवरी 2024 को जब अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब पूरी नगरी दिव्यता और अलौकिक अनुभूति से भर उठी। उस क्षण को त्रेतायुग के पुनर्जागरण जैसा माना गया।
सनातन धर्म के इतिहास में स्वर्णिम क्षण
राम जन्मभूमि अयोध्या की पावन धरती पर हुआ यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि 500 वर्षों के संघर्ष, तपस्या, बलिदान और अटूट विश्वास का साकार रूप था। सदियों से जिस क्षण की प्रतीक्षा संतों, कारसेवकों और रामभक्तों ने की, वह 22 जनवरी 2024 को साकार हुआ। इसी कारण यह दिवस अब हर वर्ष एक आध्यात्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है।
सदियों की प्रतीक्षा का अंत
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सनातन धर्म के लिए अत्यंत भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखती है। यह दिन केवल एक मूर्ति स्थापना का नहीं, बल्कि सदियों की तपस्या के पूर्ण होने और आस्था की विजय का प्रतीक है। मुगलकाल से शुरू हुए संघर्ष के बाद, असंख्य बलिदानों और त्याग के बाद जब रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए, तो यह क्षण पूरे राष्ट्र के लिए गौरव और श्रद्धा का विषय बन गया।





