रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। अब किसी भी इमारत, दुकान या मकान पर बुलडोजर चलाने से पहले प्रशासन को पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
इस नए आदेश के बाद अब किसी की संपत्ति बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं गिराई जा सकेगी, जबकि वास्तव में अवैध निर्माण पाए जाने पर कार्रवाई और भी कठोर होगी।
मनमानी कार्रवाई पर रोक
पहले कई बार नगरीय निकाय बिना जांच या सूचना के निर्माण तोड़ देते थे। अब नया आदेश ऐसी मनमानी पर रोक लगाता है।
अब प्रशासन को हर कार्रवाई से पहले —
1. नोटिस जारी करना,
2. जवाब प्राप्त करना,
3. सुनवाई करना, और
4. पूरा रिकॉर्ड तैयार रखना
अनिवार्य होगा। इससे कार्रवाई पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
नोटिस की नई प्रक्रिया
अब नोटिस केवल जारी करने से बात नहीं बनेगी — उसे रजिस्टर्ड डाक से भेजना होगा, और उसकी एक प्रति भवन की दीवार पर चिपकाना भी जरूरी होगा। इससे प्रभावित व्यक्ति यह नहीं कह सकेगा कि उसे सूचना नहीं मिली।
15 दिन की अपील अवधि
नए नियम के अनुसार, किसी भी ध्वस्तीकरण आदेश के बाद 15 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस दौरान प्रभावित व्यक्ति को अपील करने या स्वयं निर्माण हटाने का अवसर मिलेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई आगे बढ़ा सकेगा।
अब हर कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी
नई व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब हर ध्वस्तीकरण की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज होगा कि मौके पर कौन-कौन अधिकारी, पुलिसकर्मी और कर्मचारी मौजूद थे। इससे किसी भी विवाद की स्थिति में साक्ष्य सुरक्षित रहेंगे।
अफसरों पर भी तय होगी जिम्मेदारी
अब यदि कोई अधिकारी नियमों की अनदेखी करते हुए किसी की संपत्ति गिराता है, तो नुकसान की भरपाई उसकी जेब से होगी। साथ ही, उसके खिलाफ अभियोजन या अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकेगी।
डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सभी नगर निगम और नगर पंचायतों में डिजिटल पोर्टल बनाए जाएंगे।
इस पोर्टल पर हर केस की जानकारी — नोटिस, जवाब, आदेश, सुनवाई की स्थिति आदि — जनता के लिए ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
इससे नागरिक आसानी से देख सकेंगे कि किस संपत्ति को अवैध घोषित किया गया और उसकी कार्रवाई किस चरण में है।





