उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दलों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. सत्ताधारी भाजपा 2017 की 300 से ज्यादा सीटों का मैजिक फिर से दोहराने की जुगत में है, तो समाजवादी पार्टी 2012 के 224 सीटों के आंकड़े को पार करने का दावा कर रही है. लेकिन बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने चुपचाप एक ऐसा ‘प्लान’ तैयार किया है, शायद जिससे बसपा की 20 साल बाद सत्ता में वापसी हो जाए. बसपा ने 403 में से 230 सीटों पर फोकस किया है. इन सीटों को लेकर मायावती अंदरखाने रणनीति बना रही हैं. बसपा की इस उम्मीद को लखनऊ की कांशीराम पुण्यतिथि रैली में उमड़ी लाखों की भीड़ ने संजीवनी दी है.
बसपा के अंदरूनी सुरों के मुताबिक, ‘प्लान 230’ मायावती का मास्टरस्ट्रोक है, जिसमें 230 सीटों को चिह्नित कर उन पर उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार तक का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार है. 2007 में बसपा ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था, जब मायावती ने दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण-ओबीसी के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फॉर्मूले से कमाल दिखाया. अब उसी फॉर्मूले को अपग्रेड कर 230 का टारगेट रखा गया है. पार्टी ने कहा है कि ये सीटें ऐसी हैं, जहां बसपा का पारंपरिक वोटबैंक मजबूत है और विरोधी दलों के वोट बंट सकते हैं.
इस प्लान पर हो रहा काम
मायावती ने बंद कमरों में बैठकें कर उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार की है. फोकस दलितों के अलावा अति-पिछड़ों, ब्राह्मणों, ठाकुरों और मुसलमानों पर है. एक बसपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम 100 से ज्यादा सीटों पर दलित-ओबीसी गठजोड़ को मजबूत करेंगे, तो 80 पर ब्राह्मण-ठाकुर वोटों का इंजन चलाएंगे. बाकी पर मुस्लिमों को जोड़ने की रणनीति है.” पार्टी ने हर मंडल में चार कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए हैं, जो ग्रामीण स्तर पर कैडर कैंप चला रहे हैं.
क्या है मायावती का ‘प्लान 230’, जिसने बीजेपी और सपा की उड़ा दी है नींद, लखनऊ रैली की भीड़ ने बसपा में जगा दी है उम्मीद
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