छत्तीसगढ़

परंपरागत रूप से मनाया गया होली त्यौहार श्री दूधाधारी मठ में

होली का त्यौहार परंपरागत रूप से मनाया गया। होलिका दहन के साथ ही रंगोत्सव में लोगों को रंग गुलाल लगाकर शुभकामनाएं आशीर्वाद व बधाई दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर स्थित श्री दूधाधारी मठ में होली उत्सव परंपरागत रूप से मनाया गया। होलिका दहन निर्धारित समय पर संपन्न हुआ। दूसरे दिन सुबह से ही रंगोत्सव का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालु भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भगवान का दर्शन पूजन करके पुण्य लाभ प्राप्त किया। महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा है कि- होली का त्यौहार आपसी भाईचारे एवं सौहार्द का त्यौहार है। यह हमारे सनातन परंपरा से चला आ रहा है। भगवान श्री हरि ने हिरण्यकश्पयपु के अत्याचार से भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी। हिरणकश्यपु की बहन होलिका भक्त प्रहलाद को अपने गोद में लेकर प्रचंड अग्नि में बैठ गई श्री हरि की कृपा से होलिका तो अग्नि में जल कर राख हो गई किंतु भक्त प्रहलाद सकुशल बच गया, तब से सनातन परंपरा में होली का त्यौहार मनाया जाता है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने जीवन के कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हरि के नाम का सहारा लेना चाहिए, उसके नाम का सुमिरन करते ही रहना चाहिए। उन्होंने लोगों को होली उत्सव की शुभकामनाओं सहित बधाई दी है साथ ही भगवान से संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामनाएं की है।

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