कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोल करीब ₹18 और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद भारत में कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। पिछले 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमत करीब 27 डॉलर तक बढ़ चुकी है, जिससे कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है।
कंपनियों को इस समय हर लीटर पेट्रोल पर करीब ₹18 और डीजल पर ₹35 का नुकसान हो रहा है। पिछले महीने के पीक पर ये तीनों कंपनियां हर दिन करीब 2,400 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही थीं। हालांकि एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद यह घटकर करीब ₹1,600 करोड़ रह गया है। हर 10 डॉलर के उछाल से नुकसान करीब 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
सरकारी राजस्व पर भी इसका असर दिख रहा है। तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से मिलने वाली आय पहले जहां 22% थी, वह अब घटकर करीब 8% रह गई है। अगर सरकार पूरी तरह एक्साइज ड्यूटी खत्म भी कर दे, तब भी तेल कंपनियों का मौजूदा घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
दूसरी ओर, अमेरिका समेत कई देशों में पहले ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है, जबकि पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है।





