देश

होर्मुज में मंडराए F-35, MV-22 और USS त्रिपोली, देखकर क्यों घबराया सऊदी अरब? ट्रंप से करने लगा वार्ता की मिन्नतें\

ईरान-अमेरिका के बीच चल रही जंग में दो हफ्ते के सीजफायर के दौरान अमेरिका पूरा दबाव ईरान पर बना रहा है. दोनों पक्षों के बीच कोई हमला तो नहीं हुआ है लेकिन होर्मुज पर बवाल खत्म नहीं हो रहा है. ईरान को होर्मुज से हटता नहीं देखकर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां जबरदस्त नाकेबहंदी शुरू कर दी है. यहां अमेरिका के सबसे घातक फाइटर जेट्स और युद्धपोत तैनात हो रहे हैं. इलाके में इनकी गरज सुनते ही खाड़ी देश सऊदी अरब के सिर का दर्द बढ़ गया है लेकिन क्यों?
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सऊदी अरब, अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी तुरंत हटा ले और दोबारा बातचीत की मेज पर लौट आए. सऊदी और अन्य खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने घेराबंदी जारी रखी तो ईरान बदला लेने के लिए उनके वैकल्पिक रास्ते भी बंद कर सकता है. ऐसी स्थिति उनकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगी. होर्मुज के हाहाकार के बाद भी उनका तेल अब तक दूसरे रास्तों से निकल रहा था लेकिन ट्रंप के इस कदम से वो भी खतरे में आ जाएंगे.
सऊदी अरब की चिंता कितनी जायज?
सऊदी अरब को डर है कि ईरान, अमेरिका के इस कदम के बाद लाल सागर के होर्मुज बाब अल-मंदेब को बंद कर सकता है. अमेरिका की घेराबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था को और कमजोर करने के लिए की गई है, लेकिन सऊदी अरब का कहना है कि इससे पूरा क्षेत्र खतरे में पड़ जाएगा.
सऊदी अरब ने पहले ही अपना तेल निर्यात लाल सागर के रास्ते बढ़ा दिया है और यहां से लगभग 70 लाख बैरल तेल रोजाना जा रहा है. अगर ईरान ने बाब अल-मंदेब बंद कर दिया तो सऊदी का यह सारा तेल फंस जाएगा.
दरअसल ईरान के सहयोगी बने हूती विद्रोही पहले ही बाब अल-मंदेब पर हमले कर चुके हैं. ईरान अब उन्हें फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है. सऊदी अरब ने हूतियों से वादा लिया था कि वे सऊदी जहाजों या उसके तेल पर हमला नहीं करेंगे, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित है.
अमेरिका को मनाने में जुटा सऊदी
अरब अधिकारियों ने बताया कि खाड़ी देश युद्ध को ऐसे खत्म नहीं करना चाहते जिसमें ईरान होर्मुज पर कब्जा बनाए रखे. इसलिए वे अमेरिका से कह रहे हैं कि घेराबंदी हटाकर तुरंत बातचीत शुरू करे. ईरान की तरफ से भी संकेत मिल रहे हैं कि अगर अमेरिका लचीला रुख अपनाए तो बातचीत हो सकती है. सऊदी की विशेष चिंता बाब अल-मंदेब है, जो अभी उसकी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन बना हुआ है. अमेरिका ने सोमवार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों पर पूरी घेराबंदी शुरू कर दी, तो सऊदी को सबसे बड़ा खतरा यही लग रहा है कि उसके तेल का रास्ता न बंद हो जाए.

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts