खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ धरना और उपवास रखकर विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। विरोध प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन भी किया गया।
बुधवार को केवलराम चौराहा पर आयोजित धरने में कांग्रेस कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में संविधान की प्रतियां, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र लेकर विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था की तरह काम नहीं कर रहा है और उसके फैसलों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी
धरना स्थल पर कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से महिला विरोधी मानसिकता उजागर हुई है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा। नेताओं ने कहा कि संविधान की रक्षा की लड़ाई को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के अंत में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए गए।
जिलाध्यक्ष ने लगाए आरोप
खंडवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने कहा, “चुनाव आयोग बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहा है। जिस प्रकरण में न FIR दर्ज हुई है, न कोई मुकदमा दर्ज हुआ है, ऐसे प्रकरण में अगर पर्चा निरस्त कर रहे है तो ये संविधान की एक तरह से हत्या का प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी लंबे समय से यह कृत्य करते आई है। सत्ता पाने के लिए हर हथकंडे अपना रहे है।”
उत्तमपाल सिंह ने यह भी कहा, “बाबा अंबेडकर जी ने जो संविधान बनाया है, उसकी रोज हत्या कर रहे है, इसके विरोध में कांग्रेस पार्टी ने आंदोलन किया है।”
नामांकन निरस्त होने के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था। भाजपा की ओर से उन पर आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया गया।
इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।





