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भारत के आगे फीकी पड़ने लगी चीनी इकॉनमी तो लाइन पर आया ड्रैगन! मुंह से फूट रही अच्छी-अच्छी बातें

कहने को चीनी अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले बड़ी है, मगर उसके बढ़ने की गति भारत की तुलना में काफी धीमी है. ताजा खबर है कि चीनी अर्थव्यवस्था बीती अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में तेज रफ्तार से बढ़ी, लेकिन सालाना रफ्तार पर बहुत असर नहीं पड़ा. 2023 में यह 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसके चलते चीन सरकार ने 2023 में 5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य पार कर लिया. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, व्यापारिक आंकड़े और आर्थिक पुनरुद्धार अभी ‘असमतल’ हैं.

बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था 2023 में 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. सरकार ने 2023 के लिए आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य पांच प्रतिशत तय किया था.

बीते साल यानी 2023 की आर्थिक वृद्धि दर को काफी हद तक 2022 के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से मदद मिली है. 2022 में चीन की वृद्धि दर 3 प्रतिशत रही थी. बीते साल की चौथी अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत रही है. वहीं तिमाही आधार पर यह एक प्रतिशत रही है.

बढ़ने की गति में भारत कहीं आगे
इसकी तुलना यदि भारत की जीडीपी से करें तो यह 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. जबकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 7.2 प्रतिशत की गति से बढ़ी थी. नेशनल स्टैटिकल ऑफिस (NSO) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, असल में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है. यह एनएसओ का पूर्वानुमान है. बता दें कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 प्रतिशत के अनुमान से ऊपर चल रही है.

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 जनवरी को गांधीनगर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्वास जताया कि भारत वित्त वर्ष 2027-28 तक 5 लाख करोड़ डॉलर से अधिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अभी चीन की जीडीपी 17.73 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि भारत की जीडीपी अभी 3.18 लाख करोड़ डॉलर की है.

2024-25 तक 4,000 अरब डॉलर के पार होगी : पीएचडी चैंबर
देश की अर्थव्यवस्था 2024-25 में 4,000 अरब डॉलर के पार हो जाने की उम्मीद है. वहीं 2026-27 तक इसके बढ़कर 5,000 अरब डॉलर होने का अनुमान है. उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है. उद्योग मंडल ने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक 2024 के अंत तक सोच-विचार कर रेपो दर में एक प्रतिशत तक की कटौती कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है, “भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत विकास का सबूत दिखा रही है… उपयुक्त नीतिगत उपायों के जरिये आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष उत्पन्न जोखिम को कम करने को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.”

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