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पेट्रोल 5.30 और डीजल 3 रुपये महंगा, नायरा एनर्जी ने बढ़ाए दाम; तेल संकट का असर

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। एलपीजी के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। भारत की बड़ी प्राइवेट फ्यूल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने भारत में पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। इस युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट से आने वाले तेल के टैंकर की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई शहरों में लोग फ्यूल की कमी की आशंका के चलते पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं, ऐसे में कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड लग गया है।

शहरों में पेट्रोल के ताजा भाव (रुपये प्रति लीटर):

हैदराबाद – 107.46
कोलकाता – 105.41
मुंबई – 103.54
बेंगलुरु – 102.92
भुवनेश्वर – 101.19
चेन्नई – 100.80
गुरुग्राम – 95.57
नोएडा – 95.16
दिल्ली – 94.77
चंडीगढ़ – 94.30

इस बीच सप्लाई पर दबाव और बढ़ने वाला है। रूस की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) समर्थित नायरा एनर्जी अप्रैल की शुरुआत से लगभग 35 दिनों के लिए अपना परिचालन बंद करने वाली है। इसकी क्षमता सालाना 20 मिलियन टन है। इसके बंद होने से भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता में लगभग 8% की कमी आएगी। कंपनी के बताया कि मेंटेनेंस के कारण यह रिफाइनरी 35 दिन बंद रहेगी। नायरा एनर्जी के देशभर में काफी पेट्रोल पंप हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यहां ईंधन की कमी देखी जा सकती है।

वैश्विक स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान के साथ तनाव के बीच अब रूस-यूक्रेन संघर्ष ने भी तेल सप्लाई को प्रभावित किया है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस की तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है और कई टैंकरों को जब्त किया गया है, जिससे रूस की तेल निर्यात क्षमता का करीब 40 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है।

रूस के साथ यह संकट ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। गुरुवार को ब्रेंट ऑयल में करीब 2 फीसदी की तेजी आई। इस तेजी के साथ यह प्रति बैरल 104 डॉलर के पार चला गया। वहीं अमेरिकी ऑयल (WTI) में भी करीब 2 फीसदी की वृद्धि हुई और यह प्रति बैरल 92 डॉलर के ऊपर था।

 

 

 

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