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मौत के बाद भी रोशनी बनेंगे हरीश राणा, आंखों से देखेगी दुनिया, दिल के वॉल्व देंगे नई जिंदगी

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा ने दुनिया को अलविदा कहने से पहले उन लोगों के जीवन में उम्मीद की रोशनी भर दी, जो अपने प्रियजनों को बेबस हालत में देख रहे होते हैं और चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। लंबे समय तक इलाज, प्रयास और उम्मीद के बावजूद जब कोई रास्ता नहीं बचता, ऐसे हालात में हरीश राणा से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक नई दिशा लेकर आया। पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति मिलने के 13 दिन बाद उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन जाते-जाते वे कई लोगों के जीवन में नई रोशनी और उम्मीद छोड़ गए।

हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। उनके माता-पिता ने बेटे की पीड़ा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की अनुमति मांगी, जिसे मंजूरी मिल गई। इसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया और जीवन रक्षक उपकरण हटाए जाने के आठवें दिन उन्होंने अंतिम सांस ली।

माता-पिता बेटे के अंगों को दान करने की बात कर रहे थे। हालांकि, हरीश 13 सालों से कोमा में थे। पैसिव यूथेनेशिया के कारण उनका हार्ट, किडनी और लिवर दान नहीं हो सकता था। एम्स प्रशासन का कहना है कि हरीश के दोनों आंखों की कॉर्निया और हार्ट के चारों वॉल्व को सुरक्षित किया गया है।

एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, यदि कॉर्निया उपयुक्त पाई जाती है, तो दो दृष्टिबाधित लोगों को रोशनी मिल सकेगी। यानी हरीश की कॉर्निया के जरिए वे इस दुनिया को देख पाएंगे। एम्स प्रबंधन का कहना है कि अंगदान के बाद हरीश के पार्थिव शरीर को परिवार को सौंपा गया। अब सुप्रीम कोर्ट में एम्स की ओर से रिपोर्ट पेश की जाएगी।

हरीश राणा की मौत पैसिव यूथेनेशिया का भारत में पहला मामला है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर इच्छामृत्यु को मंजूरी दी थी। 14 मार्च को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। जीवन रक्षक यंत्रों के पूरी तरह बंद किए जाने के आठवें दिन मंगलवार की शाम 4:10 बजे हरीश राणा ने आखिरी सांस ली।

दरअसल, हरीश राणा 20 अगस्त 2013 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई के दौरान एक हादसे का शिकार हो गए थे। हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद वे कोमा में चले गए। इसके बाद 13 सालों तक उनके माता-पिता ने उनकी सेवा और देखभाल की। वे कृत्रिम पोषण के सहारे जीवित थे।

आखिरकार, हरीश राणा ने अपने जाने के बाद भी दूसरों के जीवन को नई दिशा देने का संदेश दिया, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।

 

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