नई दिल्ली। विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद का असर कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। सरकारी बैंक, दफ्तर, परिवहन सेवाएं और बाजार आंशिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि आपातकालीन सेवाओं के सामान्य रूप से जारी रहने की संभावना है।
करीब 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम ने इस बंद का आह्वान किया है। मजदूर संगठनों का कहना है कि नए लेबर कोड्स से कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हुए हैं और नौकरी की सुरक्षा घटी है। वे निजीकरण, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध जता रहे हैं। साथ ही, किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में इस बंद को समर्थन दिया है।
बैंकों पर असर
सरकारी बैंकों में कामकाज प्रभावित हो सकता है क्योंकि, कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों ने इस बंद को सपोर्ट करने की घोषणा की है। हालांकि, आरबीआई या बैंकों की ओर से आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में शाखाएं खुली रह सकती हैं, लेकिन लेनदेन, चेक क्लीयरेंस और अन्य सेवाओं में देरी संभव है। ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रहने की उम्मीद है। निजी बैंकों में सेवाएं लगभग सामान्य रह सकती हैं।
यातायात और बाजार
कुछ क्षेत्रों में चक्का जाम की संभावना है, जिससे बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हो सकती हैं। स्थानीय स्तर पर बाजार और दुकानें बंद रह सकती हैं। सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति कम रहने की आशंका है।
स्कूल-कॉलेज और जरूरी सेवाएं
देशभर में स्कूल और कॉलेज बंद रखने की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन केरल, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में कुछ शैक्षणिक संस्थान बंद रह सकते हैं। अस्पताल, एंबुलेंस, एयरपोर्ट और अन्य आवश्यक सेवाओं के सामान्य रूप से संचालित रहने की संभावना है, हालांकि यातायात बाधित होने से लोगों को परेशानी हो सकती है।
किसान संगठनों के आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया किसान सभा ने बंद को पूरा समर्थन दिया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित ट्रेड डील से मल्टीनेशनल कंपनियों को लाभ होगा और भारतीय किसानों, खासकर डेयरी व कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है।





