छत्तीसगढ़

रामचरित मानस लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैः कुलबीर

0 ग्राम कुसमी में आयोजित गायन गायन प्रतियोगिता का हुआ समापन
*राजनांदगांव।*
ग्राम कुसमी (भर्रेगांव) में सरस्वती मानस परिवार, बाल निकेतन युवा संघ व ग्रामवासियों द्वारा 07 व 08 फरवरी को दो दिवसीय मानस गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्पर्धा के समापन अवसर पर रविवार को मुख्य अतिथि के रूप समाजसेवी व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा शामिल हुए।
मानस महोत्सव को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी श्री छाबड़ा ने कहा कि आज इस पावन अवसर पर, दो दिवसीय मानस गान जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य की बात है। रामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, भक्ति और मानव मूल्यों की जीवंत धारा है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस के माध्यम से हमें यह सिखाया कि भक्ति और कर्म, प्रेम और मर्यादा, तथा त्याग और सेवा कार्य जीवन के अभिन्न अंग हैं। जब इन चौपाइयों और दोहों का गान होता है, तो केवल शब्द नहीं गूंजते, बल्कि हमारी आत्मा तक संस्कार पहुंचते हैं।
श्री छाबड़ा ने मानस प्रेमियों से सत्कार्य करने एवं मानस गान की यह परंपरा लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बनाए रखने का आव्हान किया। आज के भौतिकता से भरे समय में ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, मन को शांति देते हैं और समाज में सद्भाव व नैतिकता का संचार करते हैं। मैं आयोजक समिति के पदाधिकारियों को हृदय से बधाई देता हूं, जिन्होंने इतने सुंदर और अनुशासित ढंग से इस दो दिवसीय आयोजन को साकार किया साथ ही सभी मानस मंडलियों का अभिनंदन करता हूँ, जो अपने कंठ और साधना से रामकथा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। मैं प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करता हूँ कि यह मानस गान सभी के जीवन में शांति, सद्भाव और सदाचार का प्रकाश फैलाए। मानस महोत्सव में प्रमुख रूप से सरपंच कुमारीबाई जैन, चंद्रकुमार साहू, खुमान सिंग साहू, डामनलाल साहू, सुरेश साहू, भूषण, श्याम, लोकेश्वर, कुलेश्वर दास कुंवर, परमानंद साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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