छत्तीसगढ़

सोशल मीडिया इस लेख को शेयर करें श्री विष्णु देव साय, माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ का गणतंत्र दिवस संदेश -बिलासपुर , 26 जनवरी 2026

उज्ज्वल है और हम इसकी बेहतरी के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
प्रदेश की नई औद्योगिक नीति युवा आबादी के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीदें लेकर आई है। नई नीति के तहत हम सिंगल विंडो सिस्टम और इज आफ डूइंग बिजनेस के तहत निवेश में अनुदान प्रावधान तथा अन्य आकर्षक सुविधाएं

निवेशकों को प्रदान कर रहे हैं। नई नीति के तहत हमने मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और बंगलुरू जैसे महानगरों के साथ ही जापान एवं दक्षिण कोरिया में भी निवेश सम्मेलन किये।
जापान में आयोजित होने वाला ओसाका वर्ल्ड एक्सपो उद्यमियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से है। यहां हमने छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं को दिखाते हुए पवैलियन लगाया और नई औद्योगिक नीति तथा छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। हमने यह सारी जानकारी जापानी भाषा में दी, यह उनके लिए अनूठा अनुभव था। दोनों ही देशों के निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में निवेश करने पर रुचि दिखाई। देश-दुनिया से अब तक हमें 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, इन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
हमने स्टेट कैपिटल रीजन का निर्माण किया है और इसके तेज विकास के लिए प्राधिकरण का गठन किया है। व्यवस्थित विकास और फ्यूचर प्लानिंग के चलते यह रीजन देश के सबसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक केंद्र तथा इज आफ लिविंग के मामले में

देश के अग्रणी शहरों में होगा। यहां हम ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने पर भी काम कर रहे हैं ताकि दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां से अपना कार्य कर सकें।
भविष्य एआई का है। ऊर्जा की अपार उपलब्धता के चलते एआई से जुड़े उपक्रमों की धुरी छत्तीसगढ़ से संचालित होगी। हमने अटल नगर नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क आरंभकिया है। इसकी लोकेशन भी इसको महत्वपूर्ण बनाती है, यहां से देश के कोने-कोने में डाटा सबसे कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। सेमीकंडक्टर यूनिट पर काम शुरू हो गया है। आईटी हब के साथ ही नवा रायपुर फार्मा हब के रूप में भी उभर रहा है। मेडिसिटी के पूरी तरह विकसित होने पर नवा रायपुर देश के सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल हब में से एक होगा।
छत्तीसगढ़ देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां जनविश्वास विधेयक लाकर हमने अनेक प्रावधानों को अपराध मुक्त कर दिया है। इससे उद्यमियों और कारोबारियों में उत्साह का माहौल है।
नक्सलवाद के दंश ने बस्तर के विकास में काफी बाधा पहुंचाई। अब हमारे सामने बड़ी चुनौती यह है कि मिशन मोड पर विकास कार्य कर बस्तर को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

हमने इसके लिए पूर्व में गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित रहे गांवों में नियद नेल्ला नार योजना शुरू की है। 69 सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 403 गांवों में इस योजना के तहत शासन के 17 विभागों की भागीदारी से 53 हितग्राही मूलक योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
जब पहली बार महतारी वंदन योजना के लिए सर्वे हुआ तो गंभीर नक्सल प्रभावित होने की वजह से इन इलाकों की महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका था। हमने इस योजना के तहत पुनः सर्वे किया और अब इन गांवों की माताओं-बहनों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है।
बस्तर में अधोसंरचना विकास के लिए जो मेहनत डबल इंजन की सरकार ने की है। वैसी मेहनत कभी नहीं हुई थी। विशाखापट्नम में गूगल द्वारा 15 बिलियन डॉलर की लागत से एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर हब बनाया जा रहा है। विशाखापट्नम से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जुड़ रहा है। यह एक्सप्रेस-वे छत्तीसगढ़ की समृद्धि रेखा बनेगा और पोर्ट सिटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने में मदद करेगा।

इंद्रावती और महानदी को जोड़े जाने की पहल बस्तर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बस्तर और सरगुजा के अंदरूनी इलाकों में सड़कें बनाने के साथ ही यहां लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए हमने मुख्यमंत्री बस सेवा योजना आरंभ की, इसका संचालन स्थानीय लोग ही कर रहे हैं। इससे लोगों के समय की काफी बचत हो रही है और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो गई है।
हमारे प्रयासों से धरती के स्वर्ग बस्तर में पर्यटक लौट रहे हैं। इस साल नये वर्ष में एशिया का नियाग्रा कहा जाने वाला चित्रकोट जलप्रपात पर्यटकों की संख्या में आये उफान का गवाह भी रहा। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और इसकी अद्भुत जनजातीय संस्कृति को देश-दुनिया को दिखाने हमने इस वर्ष भी बस्तर पंडुम का आयोजन कर रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत हमने कवर्धा में भोरमदेव को शामिल किया और अब यहां काशी विश्वनाथ की तरह कारिडोर बनने का काम आरंभ हो गया है। हमें इस बात की हार्दिक खुशी है कि बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है, इससे जैव-विविधता को सहेजने में मदद मिलेगी।

संस्कृत की श्रेष्ठ कविता मेघदूतम् की प्रेरणा कालिदास को सरगुजा से मिली। सरगुजा संभाग धरती के सबसे सुंदर हिस्सों में से है। यहां पर्यटन को प्रोत्साहित करने हम काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने और होम स्टे में निवेश पर आकर्षक प्रावधान देने का बेहतर नतीजा सामने आ रहा है। जशपुर में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जशपुर का मयाली भी स्वदेश दर्शन योजना में शामिल हो गया है।
रेल-सड़क और हवाई सेवाओं के विस्तार का असर सरगुजा संभाग के तेज विकास में नजर आ रहा है। यहां निवेश पर किये गये आकर्षक प्रावधानों के चलते तेजी से आर्थिक निवेश हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी अधोसंरचना को भी हम बेहतर कर रहे हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 359 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये हैं। इसके साथ ही यहां 220 बिस्तर वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

नगरीय निकायों की सुंदरता एवं यहां बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने हम मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इसके अच्छे नतीजे सामने आये हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ के सभी शहरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री जी ने मन की बात कार्यक्रम में बिल्हा की स्वच्छता दीदियों की प्रशंसा भी की है। रायपुर को प्रामिसिंग स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है और गार्बेज फ्री सिटीज की 7 स्टार रेटिंग मिली है। तीन लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिलासपुर को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के माध्यम से हम 525 करोड़ रुपए की लागत से सभी नगर निगमों में अधोसंरचना के बुनियादी महत्व के कार्य करा रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के माध्यम से रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 तथा कोरबा में 40 ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अटल जी के जन्मशताब्दी को यादगार बनाने हम सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर बना रहे हैं।

अटल जी द्वारा दिखाये सुशासन की राह पर हम निरंतर चल रहे हैं। प्रशासनिक कार्यप्रणाली के हर स्तर पर सुशासन को अपनाया गया है। सुशासन की पहली शर्त है पारदर्शिता, इसे अपनाते हुए हमने डिजिटल गवर्नेस को हर स्तर पर अपनाया है। ई-ऑफिस के माध्यम से हमने सरकारी कामकाज में समयसीमा, गुणवत्ता और पारदर्शिता स्थापित की है। बायोमीट्रिक अटेंडेंस हमने सभी विभागों में लागू किया है। ठीक सुबह 10 बजे अपनी उपस्थिति बायोमीट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करानी होती है। अधिकारी-कर्मचारी तय समय पर अपनी जगह पर बैठ जाते हैं और कामकाज शुरू हो जाता है। हमने खरीदी में जेम पोर्टल को अपनाया है और इससे सरकारी खरीदी में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगी है।
शासन प्रणाली में आये इन असाधारण बदलावों का असर राज्य की जीएसडीपी में नजर आ रहा है। जीएसडीपी वर्ष 2024-25 का अग्रिम अनुमान 3 लाख 29 हजार 752 करोड़ रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.51 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार 2023-24 की तुलना में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 62 हजार 870 रुपए हो गई है।

हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हमारे लिए सबसे अहम है। श्रीरामलला हमारी सांस्कृतिक आस्था के केंद्र हैं। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना से अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के पुण्य दर्शन का लाभ ले चुके हैं। भारतभूमि विलक्षण है जहां उत्तर-दक्षिण-पूरब-पश्चिम हर कोने में पुण्यस्थल मौजूद हैं। प्रदेशवासियों को इनके दर्शन कराने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना भी शुरू की गई है, जिसमें अब तक 5 हजार श्रद्धालु तीर्थ स्थलों का दर्शन कर चुके हैं।
अभी रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन हमने किया। इस आयोजन के माध्यम से हमने ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल सहित दिग्गज साहित्यकारों की प्रेरणा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अपनी बोली-भाषा, लोककला, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने हम ऐसे कार्यक्रम करते रहेंगे।

राज्य के सर्वांगीण विकास में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की प्रमुख भूमिका रही है। इसमें हमारे छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों का अनुकरणीय योगदान है। इन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कार्यरत समस्त बल को सम्मान स्वरूप राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक प्रदान किए जाने की मैं घोषणा करता हूं।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए बनाये गये अंजोर विजन डाक्यूमेंट के अनुरूप हम लगातार कार्य करते रहेंगे। जनभागीदारी से हम छत्तीसगढ़ महतारी को संवारते रहेंगे। मुझे इस अवसर पर स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया जी की कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं…
“सरग ला पृथ्वी मा ला देहूं प्रण अइसन ठाने हव मोर संग चलव रे मोर संग चलव जी मोर संग चलव गा मोर संग चलव रे”

मस्तूरिया जी की इन पंक्तियों को साकार करना है और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। आप सभी की भागीदारी से निश्चित ही हम यह लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
आप सभी को गणतंत्र दिवस की पुनः बहुत-बहुत बधाई।
जय भारत, जय छत्तीसगढ़

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 :मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का प्रदेश की जनता के नाम संदेश का मूलपाठ-बिलासपुर –

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