नवरात्र से शुरू हुआ त्योहारों का सीजन भाई दूज के साथ ही समाप्त हो चुका है और सोने की खरीदारी में भी सुस्ती दिखने लगी है. अब सभी की नजरें अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व पर टिकी हैं और आने वाले समय में फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल क्या फैसला लेते हैं, यही सोने का भविष्य तय कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही सोने के भाव में बड़ी उथल-पुथल दिखाई दे सकती है. पिछले सप्ताह ही सोने के भाव में बड़ी गिरावट दिखी और माना जा रहा है कि यह सुस्ती आगे भी जारी रह सकती है.
कमोडिटी एक्सपर्ट का मानना है कि इस हफ्ते घरेलू बाजार में सोने की कीमतें कुछ हद तक स्थिर रह सकती हैं. विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशक प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों और वैश्विक व्यापार घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं. फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयान पर खास नजर रखेंगे. जेएम फाइनेंशियल के उपाध्यक्ष प्रणव मेर का कहना है कि हाल ही में सोने की कीमतें दस हफ्तों में पहली बार गिर गईं हैं. इसका कारण निवेशकों की मुनाफा वसूली, भारत और चीन में कमजोर मांग तथा मजबूत अमेरिकी डॉलर है.
क्या कीमतें और नीचे आएंगी
प्रणव ने कहा कि भारत में खरीदार कीमतें और गिरने की उम्मीद में कम खरीद रहे हैं, जबकि चीन और सिंगापुर में कम कीमतों ने खरीदारी बढ़ा दी है. एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 3,557 रुपये की गिरावट आई है. एंजेल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि सोने में यह गिरावट निवेशकों की मुनाफा वसूली करने और अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में सुधार के संकेतों के कारण आई है.




