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हक की लड़ाई का नया अध्याय, असदुद्दीन औवैसी ने सीमांचल न्याय यात्रा के लिए भरी हुंकार

सीमांचल के विकास, न्याय और अधिकारों को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में आज (24 सितंबर) से सीमांचल न्याय यात्रा शुरू हो रही है. यह चार दिवसीय यात्रा 27 सितंबर तक चलेगी, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिलों के कई हिस्सों का दौरा किया जाएगा. सीमांचल न्याय यात्रा का उद्देश्य सीमांचल क्षेत्र में फैली समस्याओं जैसे बेरोजगारी, बाढ़, खराब बुनियादी सुविधाएं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को लेकर जन जागरूकता फैलाना और सरकार तक आवाज पहुंचाना है. ओवैसी का कहना है कि यह आंदोलन सीमांचल के लोगों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है.
कार्यकर्ताओं में उत्साह
स्थानीय कार्यकर्ताओं में इस यात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. किशनगंज के एक युवा कार्यकर्ता ने कहा, “ओवैसी साहब हमारी उम्मीद हैं. सीमांचल की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकेगा”. बताया जा रहा है कि यात्रा के हर दिन की पूरी जानकारी पोस्टरों और सोशल मीडिया के जरिए साझा की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें. AIMIM की यह पहल सीमांचल में राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई को नया आयाम दे रही है.
कैसे चलेगी यात्रा?
बता दें कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा 24-27 सितंबर तक किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार में अधिकारों और समस्याओं पर जनजागरण का अभियान है.

24 सितंबर को किशनगंज के पोठिया, ठाकुरगंज, बहादुरगंज और जनता हाट जैसे इलाकों से यात्रा की शुरुआत होगी.
25 सितंबर को अररिया के विभिन्न क्षेत्रों में सभाएं होंगी.
26 सितंबर को पूर्णिया में रैलियों का आयोजन किया जाएगा.
यात्रा का समापन 27 सितंबर को फिर किशनगंज लौटकर डांगरा, बलरामपुर और बरसोई जैसे इलाकों में जनसभाओं के साथ होगा.
क्या ओवैसी बन पाएंगे सीमांचल की आवाज?

एआईएमआईए प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा बिहार की सियासत में एक नए मोड़ की ओर संकेत कर रही है. असदुद्दीन ओवैसी इस यात्रा के माध्यम से ओवैसी सीमांचल के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं. AIMIM की इस पहल से सीमांचल में राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई को नया आयाम मिल रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा का आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या यह सीमांचल के लोगों के लिए एक प्रभावी आवाज बन पाएगी.

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