ईरान और इजराइल के बीच लगभग 50 दिनों से तनाव देखने को मिला. इस टेंशन का असर दुनियाभर के तेल और गैस सप्लाई पर भी पड़ा. करीब 50 अरब डॉलर का कच्चा तेल बाजार तक पहुंच ही नहीं पाया क्योंकि उसका प्रोडक्शन नहीं हो सका. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट ने जानकारी दी है कि इस संकट का असर सिर्फ अभी नहीं बल्कि आने वाले कई महीनों और सालों तक महसूस किया जाएगा, क्योंकि सप्लाई में आई यह कमी जल्दी पूरी होना मुश्किल है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि लेबनान में हुए युद्धविराम समझौते के बाद होर्मुज फिर से खोल दिया गया है यानी अब कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही संभव है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए जल्द ही कोई समझौता हो सकता है. हालांकि इस डील के समय को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है.
तेल सप्लाई को बड़ा नुकसान
फरवरी के अंत में शुरू हुए इस संकट के बाद से ग्लोबल मार्केट से 50 करोड़ (500 मिलियन) बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और कंडेन्सेट बाहर हो चुका है. Kpler के आंकड़ों के अनुसार, इसे एनर्जी सप्लाई में सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है, जिससे पूरी दुनिया में सप्लाई पर काफी दबाव आ गया है.




