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होर्मुज खुला, क्‍या अब सस्‍ता होगा एलपीजी सिलेंडर

ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह खोलने की घोषणा कर दी है. अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पिछले 47 दिनों से यह मार्ग लगभग बंद पड़ा था. दुनिया का लगभग 20% तेल और भारी मात्रा में एलपीजी (LPG) इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है. जब यह मार्ग बंद हुआ, तो भारत जैसे देशों के लिए गैस और तेल की आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया. शुक्रवार को ईरान द्वारा इस जलमार्ग को फिर से खोलने की आधिकारिक घोषणा के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में गिरावट आएगी?

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है. सऊदी अरब, यूएई, इराक और कतर जैसे देशों से आने वाले गैस टैंकरों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य ही सबसे छोटा और सस्ता रास्ता है. यह मार्ग बंद होने के कारण न केवल आपूर्ति में देरी हुई, बल्कि रिफाइनरियों और वितरकों को कम स्टॉक के साथ काम करना पड़ा. एलपीजी की किल्‍लत होने पर सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए थे.
होर्मुज के खुलने से तुरंत गैस के दाम में कटौती होगा, ऐसी संभावना नहीं है. इसका कारण यह है कि भले ही होर्मुज खुल गया हो, लेकिन एलपीजी सप्‍लाई जल्‍दी ही युद्ध पूर्व स्‍तर पर नहीं आएगी. इसका कारण है कतर के कतर के रास लफान स्थित प्रमुख गैस उत्पादन केंद्र पर ईरान द्वारा किए गए हमले. इन हमलों ने कतर की कुल 17% एलएनजी निर्यात क्षमता को पूरी तरह ठप कर दिया है.क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत में 3 से 5 साल का समय लग सकता है, जिसका मतलब है कि वैश्विक बाजार में हर साल 1.28 करोड़ टन एलएनजी की भारी कमी बनी रहेगी. कतर से भारत सबसे ज्‍यादा प्राकृतिक गैस आयात करता है.
होर्मुज के खुलने से वैश्विक ऊर्जा परिवहन पर दबाव कम होगा. शिपिंग मार्ग अब सामान्य हो सकेंगे, यात्रा समय घटेगा और बीमा लागत में भी कमी आने की उम्मीद है. वैकल्पिक मार्गों के कारण जो अतिरिक्त खर्च बढ़ गया था, वह भी कम हो जाएगा. इससे भारत की ऊर्जा कंपनियों की आयात लागत कम होगी और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. भारतीय आयातकों को फिर से अधिक विकल्प मिलेंगे. वे खाड़ी देशों के व्यापक समूह से खरीदारी कर सकेंगे और बेहतर शर्तों पर सौदे कर पाएंगे.

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