रायपुर में भारतमाला परियोजना घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े लोगों के आधा दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
जानकारी के मुताबिक, ईडी के 13 अधिकारियों की टीम इस कार्रवाई को अंजाम दे रही है। टीम ने अभनपुर स्थित गोपाल गांधी के घर और ऑफिस में दबिश दी। सुबह तड़के पहुंची टीम अब तक दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है।
इस मामले में केवल गोपाल गांधी ही नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है। भूपेंद्र चंद्राकर पर आरोप है कि उन्होंने अभनपुर सहित अलग-अलग तहसीलों में अपने करीबियों को भारतमाला घोटाले के तहत करोड़ों रुपए का मुआवजा दिलवाया।
क्या है पूरा मामला
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हुए जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली का आरोप है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि भूमि में बदला गया और उसका मुआवजा कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया। इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के अधिकारियों—एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी—की जमीन दलालों के साथ मिलीभगत सामने आई है। एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों को मुआवजा दिया गया।
अब तक की कार्रवाई
मामले में ईडी ने कार्रवाई करते हुए पूर्व में रायपुर और महासमुंद में छापेमारी कर करोड़ों की संपत्तियां अटैच की हैं, और 40 लाख रुपए से ज्यादा नकदी जब्त हुई है। इस मामले में तत्कालीन एसडीओ निर्भय साहू सहित अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, EOW ने 10 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, जिसमें सरकारी अधिकारी और जमीन दलाल शामिल हैं।





