टीएमसी के कांग्रेस में विलय की चर्चा निकल पड़ी है. ये कोई ब्रेकिंग न्यूज नहीं है. ये पुरानी बात है. सोनिया गांधी इसे बखूबी जानती हैं. ममता बनर्जी के साथ उनका रिश्ता राजीव गांधी के जमाने का है. ममता के हाथ से टीएमसी निकलती जा रही है. इसलिए सोनिया ने वो पुरानी बात दोहराई है. इसकी शुरुआत एक एंटनी ने की थी. केरल के इस कद्दावर नेता को 2014 में मिली हार की समीक्षा करने को कहा गया था. उन्होंने हार के कारण भी बताए और भविष्य के लिए सिफारिशें भी की. एंटनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कांग्रेस पार्टी जरूरत से ज्यादा केंद्रीकृत और कुछ व्यक्तियों पर निर्भर हो गई है. निचले स्तर पर पहल और जवाबदेही कमजोर पड़ गई. इसलिए आंतरिक सुधार के तहत यह सुझाव दिया गया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत किया जाए, राज्य और जिला इकाइयों को अधिक स्वायत्तता और जिम्मेदारी दी जाए, और निर्णय लेने की प्रक्रिया केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित न रहे.कमेटी ने कहा कि कांग्रेस का संगठन सुस्त,बिखरा हुआ और चुनावी हकीकत से कटा हुआ हो गया है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि पार्टी ढांचे को बूथ स्तर से ऊपर तक फिर से खड़ा किया जाए,जिसमें जिम्मेदारियों और संवाद की स्पष्ट व्यवस्था हो.
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