मैहर। जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। शातिर ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस, टेलीकॉम विभाग और सीबीआई का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को डराया-धमकाया और उनसे 22 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, ग्राम इटमा कोठार निवासी 69 वर्षीय मानेन्द्र सिंह, जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से सेवानिवृत्त हैं, को 5 मई 2026 को एक कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने अपना नाम अदिति शर्मा बताते हुए खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग की अधिकारी बताया। महिला ने दावा किया कि पीड़ित के नाम पर दिल्ली में एक बैंक खाता संचालित है, जिसका उपयोग करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है।
इसके बाद महिला ने गिरफ्तारी और वारंट जारी होने का डर दिखाया। जब मानेन्द्र सिंह ने उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दिल्ली आने में असमर्थता जताई तो उनकी बात कथित आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम और फिर खुद को सीबीआई टीम लीडर बताने वाले प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से कराई गई। आरोपियों ने जांच का हवाला देकर उन्हें पूरी तरह अपने प्रभाव में ले लिया।
ठग लगातार व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क में रहे और उन्हें किसी से भी बातचीत नहीं करने की हिदायत दी। इतना ही नहीं, उनसे नियमित रूप से “WE ARE SAFE” नाम का कोडवर्ड भेजने को भी कहा जाता था, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
जांच के नाम पर आरोपियों ने पीड़ित से बैंक खातों और फिक्स डिपॉजिट की जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद मानेन्द्र सिंह ने अपनी और पत्नी के नाम की चार एफडी तुड़वाकर करीब 22.69 लाख रुपये एक खाते में जमा किए। अगले दिन रिजर्व बैंक के नाम से कथित दस्तावेज भेजकर रकम सत्यापन का बहाना बनाया गया और 22 लाख रुपये एक निजी कंपनी के खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।
जब तय समय के बाद भी पैसा वापस नहीं आया तो आरोपियों ने दोबारा संपर्क कर संपत्ति जांच का हवाला देते हुए 8 लाख रुपये और जमा कराने का दबाव बनाया। यहां तक कि घर के जेवर गिरवी रखने की सलाह भी दी गई। इसी दौरान पीड़ित को शक हुआ और उन्होंने परिजनों को पूरी बात बताई।
शिकायत मिलने पर अमरपाटन पुलिस ने अदिति शर्मा, सुनील कुमार गौतम और प्रदीप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।





