मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम महाराजपुर निवासी किसान मोहरसाय के लिए इस वर्ष का खरीफ सीजन नई उम्मीद, आत्मविश्वास और खुशहाली का संदेश लेकर आया है। लगभग 0.90 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले मोहरसाय को आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बरबसपुर, शाखा मनेंद्रगढ़ के माध्यम से समय पर खाद, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध होने से खेती की तैयारियों में बड़ी राहत मिली है। अब वे पूरे उत्साह के साथ खेतों में बुआई की तैयारी कर रहे हैं और बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं।
छोटे एवं सीमांत किसान मोहरसाय बताते हैं कि खेती का प्रत्येक मौसम उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सीमित भूमि होने के कारण समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता ही अच्छी फसल की नींव रखती है। खरीफ फसल की तैयारी के दौरान उन्हें समिति के माध्यम से यूरिया, डीएपी, उन्नत धान बीज एवं अन्य आवश्यक कृषि सामग्री समय पर उपलब्ध कराई गई। इससे उन्हें बाजार से महंगे दामों पर सामग्री खरीदने या निजी उधार लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
वे बताते हैं कि सहकारी समिति की इस सुविधा ने उनकी आर्थिक चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है। समय पर खाद और बीज मिलने से अब वे खेती के सभी कार्य निर्धारित समय पर कर पा रहे हैं, जिससे बेहतर उत्पादन की संभावना भी बढ़ गई है। उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष अच्छी पैदावार होने पर परिवार की आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत बनेगी। मोहरसाय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से समय पर खाद, बीज और कृषि ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना किसान हित में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती करने में सुविधा मिल रही है तथा वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था के सशक्त होने से अब गांवों तक कृषि संसाधनों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। पहले जहां किसानों को खेती के मौसम में खाद-बीज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था, वहीं अब आवश्यक कृषि सामग्री समय पर मिल रही है। इससे किसानों के समय, श्रम और धन तीनों की बचत हो रही है। मोहरसाय की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की किसान हितैषी योजनाएं और मजबूत सहकारी व्यवस्था ग्रामीण अंचलों में किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। समय पर उपलब्ध संसाधनों ने न केवल उनकी खेती को नई गति दी है, बल्कि उनके परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीदों को भी मजबूती प्रदान की है। ऐसी पहले किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि क्षेत्र में समृद्धि और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रेही हैं।




