हिंद महासागर तक जंग का दायरा बढ़ गया है. ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागकर दुनिया को साफ संदेश दे दिया है कि अब कोई ठिकाना सुरक्षित नहीं. भले ही एक मिसाइल फेल हो गई और दूसरी को इंटरसेप्ट कर लिया गया हो, लेकिन असली खेल ‘हिट या मिस’ नहीं, बल्कि अपने इरादे और ताकत को जाहिर करना है. करीब 4000 किमी दूर स्थित डिएगो गार्सिया को निशाना बनाकर ईरान ने अपनी घोषित 2000 किमी रेंज की सीमा को खुद ही चुनौती दे दी है.
इसका मतलब साफ है कि ईरान के पास ऐसी छुपी हुई मिसाइल ताकत हो सकती है, जिसका अंदाजा दुनिया को अभी तक नहीं है. यह कदम सिर्फ हमला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दांव है, जिससे अमेरिका और ब्रिटेन की सैन्य योजना में अनिश्चितता पैदा हो गई है. डिएगो गार्सिया कोई मामूली बेस नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक ताकत का अहम केंद्र है, जहां से हेवी बॉम्बर्स, सर्विलांस एयरक्राफ्ट और लंबी दूरी के ऑपरेशन संचालित होते हैं. ऐसे हाई-वैल्यू टारगेट को निशाना बनाकर ईरान ने सीधे-सीधे पश्चिमी ताकतों को चुनौती दे दी है.
ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने भी इसे ‘बड़ा कदम’ बताते हुए दावा किया कि मिसाइलों की रेंज दुश्मन की सोच से कहीं ज्यादा है. इस कदम के साथ ही जंग का मैदान मिडिल ईस्ट से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गया है. अब अमेरिका और ब्रिटेन को अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स को नई दिशा में तैनात करना पड़ेगा, जिससे उनकी रणनीतिक बढ़त पर दबाव बढ़ेगा.
ईरान ने दुनिया से क्या-क्या छुपा रखा है, अब यूरोप भी रडार पर? अमेरिका से जंग में खोला नया फ्रंट, SM-3 को चुनौती
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