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भारत की चौखट पर पहुंची ईरान-अमेरिका की जंग, हिंद महासागर तक पहुंची बारूदी लपटें, क्या हैं मायने?

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब तेजी से बढ़ रहा है और ये गंभीर होता जा रहा है. युद्ध के छठे दिन एक ऐसी घटना हुई जिसने खाड़ी की लड़ाई को भारत के आसपास के क्षेत्र में भी तनाव बढ़ा दिया. अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के युद्ध पोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया. यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ. इस घटना में कम से कम 87 ईरानी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो दागा, जिससे जहाज तुरंत डूब गया. उन्होंने इसे एक शांत लेकिन निर्णायक हमला बताया. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इस कार्रवाई में मार्क-48 प्रकार के भारी टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया है.
क्या थी पूरी घटना?
श्रीलंका के अधिकारियों को सुबह लगभग 5 बजे जहाज से संकट संदेश मिला. इसके बाद श्रीलंकाई नौसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. श्रीलंका के विदेश मंत्री ने बताया कि जहाज से विस्फोट की सूचना मिली थी. अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार श्रीलंका को बचाव अभियान चलाना पड़ा क्योंकि यह क्षेत्र उसके खोज और बचाव क्षेत्र में आता है-

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