मध्यप्रदेश

इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी, भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 31 पहुंचा

स्वच्छता में नंबर वन शहर कहलाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। भागीरथपुरा इलाके में शुक्रवार शाम एक और बुजुर्ग की मौत हो गई, जिसके साथ ही इस जलजनित त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 पहुंच गई है। मृतक 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी थे, जो करीब एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे।

परिजनों के अनुसार, उल्टी-दस्त से शुरू हुई बीमारी ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया। संक्रमण के कारण उनके किडनी और लिवर पर गहरा असर पड़ा और वे 20 से 25 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहे। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। फिलहाल अस्पताल में दो मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनमें एक वेंटिलेटर पर है और दूसरा आईसीयू में भर्ती है।

450 से ज्यादा लोग हो चुके हैं प्रभावित
भागीरथपुरा क्षेत्र में अब तक 450 से अधिक लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। इनमें से 8 से 10 मरीज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। शुरुआत में इस मामले में 7 मौतें दर्ज हुई थीं, लेकिन समय के साथ यह आंकड़ा बढ़ता चला गया।

कैसे फैला संक्रमण
जांच में सामने आया है कि पेयजल लाइन में ड्रेनेज या सीवर लाइन के साथ लीकेज हो गया था, जिससे पानी दूषित हो गया। इसी कारण इलाके में डायरिया, उल्टी, बुखार और कई मामलों में ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। लोगों का आरोप है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने से हालात बिगड़ते चले गए।

राजनीतिक हलचल तेज
इस घटना ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही पीड़ित परिवारों से मिलकर हालात का जायजा ले चुके हैं। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने नगर निगम और राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 3 फरवरी को इंदौर में धरना देने का ऐलान किया है।

प्रशासन का पक्ष
नगर निगम आयुक्त और मेयर का कहना है कि दूषित पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है और प्रभावित इलाकों में टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। साथ ही पानी के सैंपलों की जांच भी बढ़ा दी गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ये कदम काफी देर से उठाए गए और अब वे सुरक्षित पेयजल व्यवस्था के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

 

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