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21 साल क्लर्क रहे अमरीश पुरी, फिर बने सिनेमा के सबसे खौफनाक विलेन

हिंदी सिनेमा में अगर सबसे दमदार विलेन की बात होती है, तो सबसे पहला नाम अमरीश पुरी का आता है। पर्दे पर उनकी मौजूदगी ही हीरो के लिए डर पैदा कर देती थी। दिलचस्प बात यह है कि बॉलीवुड में कदम रखने से पहले अमरीश पुरी ने करीब 21 साल तक एक बीमा कंपनी में क्लर्क की नौकरी की थी। 38 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में एंट्री करने वाले अमरीश पुरी ने इसके बाद तीन दशकों से ज्यादा समय तक सिनेमा पर राज किया।

आज उनकी 21वीं पुण्यतिथि है। अमरीश पुरी का निधन 12 जनवरी 2005 को हुआ था, लेकिन उनके निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ज़िंदा हैं। उन्होंने विलेन के रूप में ऐसी अलग पहचान बनाई कि वह अपने दौर के सबसे महंगे और सबसे खूंखार खलनायक माने जाने लगे। बाद के वर्षों में उन्होंने सकारात्मक भूमिकाएं भी निभाईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।

नौकरी के साथ चलता रहा थिएटर का सफर

अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवागांव में हुआ था। नौकरी के दौरान भी उनका झुकाव अभिनय की ओर बना रहा। वे थिएटर से जुड़े रहे और नाटकों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते रहे, जिसने आगे चलकर उनके फिल्मी करियर की नींव रखी।

मराठी सिनेमा से शुरुआत, 38 में बॉलीवुड डेब्यू

अमरीश पुरी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1967 में मराठी फिल्म शंततु! कोर्ट चालू आहे से की। इसके बाद 1970 में उन्होंने देव आनंद की फिल्म प्रेम पुजारी से बॉलीवुड में कदम रखा। उस वक्त उनकी उम्र 38 साल थी, जो यह साबित करता है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती।

400 से ज्यादा फिल्मों का यादगार सफर

उन्हें पहली बड़ी पहचान 1971 की फिल्म रेशमा और शेरा से मिली। इसके बाद उन्होंने मिस्टर इंडिया, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, शहंशाह, मेरी जंग, राम लखन, करण अर्जुन, घातक, परदेस, गदर जैसी सैकड़ों फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। अपने साढ़े तीन दशक लंबे करियर में अमरीश पुरी ने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

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