अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद यूपी को भी बड़े नुकसान की आशंका है. यूपी के प्रमुख औद्योगिक शहरों नोएडा, कानपुर और बनारस को सबसे ज्यादा झटका लगने का अनुमान लगाया जा रहा है. इन शहरों के निर्यातकों ने नौकरियों के नुकसान, ऑर्डर के ठप होने और बाजार तक पहुंच के सिकुड़ने की चेतावनी दी है. नोएडा, कानपुर और वाराणसी के उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि शुल्क ने वर्षों की कड़ी मेहनत से बनाये गए बाजार को खतरे में डाल दिया है. इसे लेकर पिछले हफ्ते कई जिलों में विरोध प्रदर्शन भी किये गए हैं.
नोएडा ‘अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर’ के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने कहा कि नए शुल्क का परिधान क्षेत्र पर ‘प्रत्यक्ष और गंभीर प्रभाव’ पड़ेगा जो भारत के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है. नोएडा से ही सालाना 50 हजार करोड़ रुपये का कपड़ा निर्यात होता है. इसका एक-चौथाई हिस्सा यानी करीब 13 हजार करोड़ अमेरिका जाता है. अब तक निर्यात पर केवल 12 प्रतिशत शुल्क लगता था. अचानक 50 प्रतिशत शुल्क लगाने से हमारे उद्योग को गहरा नुकसान होगा.
महिलाओं से छिन सकता है रोजगार
ठुकराल ने कहा कि इस क्षेत्र में अकुशल श्रमिकों, खासकर महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा कार्यरत है. इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लोगों का रोजगार छिन सकता है. तीन-चार दशकों की जीतोड़ मेहनत के बाद हमने अमेरिकी बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. बदले हालात में रातों रात नए बाजारों में पैठ बनाना नामुमकिन है. ठुकराल ने सरकार से निर्यातकों को नुकसान का ‘कम से कम 15-20 प्रतिशत’ वापस पाने में मदद करने के लिए छूट या ब्याज-मुक्त ऋण देने पर विचार करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि उद्योग क्षेत्र केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के साथ है, लेकिन उनसे यह भी उम्मीद करता है कि सरकार व्यवसायों और श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगी.
कानपुर में प्रभावित होगा चमड़ा उद्योग
भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी चमड़ा पट्टियों में शुमार किये जाने वाले कानपुर-उन्नाव में भी उद्योग संकट का सामना कर रहा है. चमड़ा निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि अमेरिका को भेजे जाने वाले दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर लगभग रुक गए हैं. ऑर्डर रद्द हो गए हैं और फैक्ट्रियां ठप हो गई हैं. शिफ्ट कम की जा रही हैं और शुल्क जल्द ही रोजगार पर भी असर डाल सकता है. कानपुर-उन्नाव बेल्ट में चमड़े के लगभग 300 कारखाने हैं जिनसे करीब 10 लाख लोगों की रोजीरोटी जुड़ी है. भारत के चमड़ा निर्यात में 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी इसी क्लस्टर की है.
बनारस के व्यापारी सबसे ज्यादा हलकान
बनारसी साड़ियों के केंद्र वाराणसी में पिछले हफ्ते व्यापारियों ने एक विरोध प्रदर्शन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जलाए. साड़ी व्यापारी संजीव मेहता ने कहा कि शुल्क से अमेरिका में ऑनलाइन और कूरियर-आधारित बिक्री बाधित होगी. हमें अभी तक यह भी नहीं पता कि अलग-अलग वस्तुओं पर कितना टैक्स बढ़ेगा, लेकिन व्यापार पर इसका असर निश्चित है. व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पर ‘कड़े कदम’ उठाने का आग्रह किया है. भदोही के कालीन निर्यातकों, रामपुर के मेंथा तेल उत्पादकों और मुरादाबाद के पीतल के बर्तन निर्यातकों द्वारा उठाई गई इसी तरह की चिंताओं के बाद सरकार से समर्थन की मांग बढ़ गई है. रामपुर और मुरादाबाद के निर्यातकों का कहना है कि सैकड़ों करोड़ रुपये के ऑर्डर पहले ही अटके पड़े हैं जिससे कर्मचारियों की छंटनी को मजबूर होना पड़ रहा है.
कितना है यूपी का कुल निर्यात
राज्य का वार्षिक निर्यात साल 2017 में 80 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर साल 2025 में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. इसमें कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प क्षेत्र प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ नीति ने स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय और विपणन सहायता के माध्यम से वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद की है. टैरिफ की समस्या से निपटने के लिए भी सरकार जल्द ही कुछ कदम उठाएगी.




