मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नीट पीजी 2025 की काउंसलिंग को लेकर चल रहा विवाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को बड़ा झटका दिया है, जो रिक्त पड़ी सीटों को भरने के लिए राउंड 5 या विशेष रिक्ति राउंड (Special Stray Vacancy Round) की मांग कर रहे थे. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि नीट पीजी काउंसलिंग की प्रक्रिया को अब और नहीं खींचा जा सकता.
फरवरी 2026 के अंत तक मेडिकल पीजी कोर्स की कई सीटें खाली रह गईं थीं और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नया राउंड कराने से मना कर दिया था. उम्मीदवारों का तर्क था कि योग्य डॉक्टर होने के बावजूद सीटें खाली रहना देश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए नुकसानदेह है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नियमों की मर्यादा और समय सीमा को सबसे ऊपर मानते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है. इस फैसले के साथ ही अब नीट पीजी 2025 के तहत एडमिशन का दरवाजा पूरी तरह बंद हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नीट पीजी 2025 पर फुल स्टॉप
सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश ने काउंसलिंग प्रक्रिया की अनिश्चितता को खत्म कर दिया है. समझिए सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और इसके पीछे का तर्क:
याचिका में क्या मांग थी?
- राउंड 5 का आयोजन: ऑल इंडिया कोटा के तहत खाली पड़ी एमडी (MD), एमएस (MS) और डीएनबी (DNB) सीटों को भरने के लिए एक अतिरिक्त राउंड आयोजित किया जाए.
- NMC के फैसले को चुनौती: याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के उस नोटिस को भी चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि अब कोई विशेष राउंड नहीं होगा.
नीट पीजी काउंसलिंग के बाद सीटें खाली कैसे रह गईं?
याचिका में दलील दी गई थी कि 28 फरवरी 2026 को कई सीटें इसलिए खाली रह गईं क्योंकि आवंटित उम्मीदवारों ने मेडिकल कॉलेज में जॉइन नहीं किया या समय पर रिपोर्ट नहीं किया. मेडिकल स्टूडेंट्स का तर्क था कि नीट पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान ‘नॉन-रिपोर्टिंग’ एक सामान्य समस्या है और योग्य उम्मीदवारों को इन सीटों पर मौका मिलना चाहिए.
नीट पीजी 2025 पर कोर्ट और एनएमसी का क्या रुख है?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:
- कट-ऑफ का महत्व: मेडिकल कॉलेज में दाखिले की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 पहले ही तय की जा चुकी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ही पूर्व में अप्रूव किया था.
- अनुशासन की जरूरत: मेडिकल कोर्सेज में सेशन का समय पर शुरू होना अनिवार्य है. बार-बार राउंड आयोजित करने से शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित होता है.ॉ
- एनएमसी की दलील: बोर्ड ने पहले ही कह दिया था कि 28 फरवरी के बाद कोई भी दाखिला ‘अनधिकृत’ (Unauthorized) माना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 1,100 से अधिक पीजी सीटें इस सत्र में खाली रह सकती हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्टूडेंट को ‘स्पेशल केस’ मानकर एडमिशन नहीं दिया जाएगा. उम्मीदवारों को अगले सत्र यानी नीट पीजी 2026 की तैयारी पर फोकस करना चाहिए.




