अखिलेश यादव ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि बीजेपी नारी को नारा बनाने की कोशिश में लगी है. हम महिला आरक्षण के समर्थन में हैं. हमें जेंडर और सेाशल जस्टिस के पक्ष में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने खुद नारी को अपने संगठन में नहीं रखा. सच तो ये है कि बीजेपी जातिगत जनगणना को टालना चाहती है. ये धोखे का काला दस्तावेज है. अखिलेश यादव ने इस विधेयक को पेश किए जाने से पहले ही अपना रुख साफ कर दिया था कि वह इस विधेयक के पक्ष में तो हैं, लेकिन पहले जातिगण जनगणना कराई जानी चाहिए, क्योंकि सही आंकड़े के बाद ही सही महिला आरक्षण आ पाएगा. अखिलेश यादव ने क्या प्रमुख बातें कहीं, आइये जानते हैं…
अखिलेश यादव ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिनकी अपनी पार्टी और सरकारों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है, वे महिलाओं के सम्मान और अधिकार की बात कैसे कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा अपने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह बताए कि कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में जो महिला मुख्यमंत्री हैं, उनके पास भी पूर्ण अधिकार नहीं हैं.
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर वैश्विक आंकड़ों को देखें तो जेंडर इक्विटी में भारत 146 देशों में 127वें स्थान पर है, जो महिलाओं की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि भाजपा के पास महिला सशक्तिकरण के दावे तो हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है.
उन्होंने दोहराया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सवाल यह है कि इतनी जल्दबाजी क्यों? उनके मुताबिक, भाजपा जनगणना और जातीय जनगणना से बचना चाहती है, क्योंकि जैसे ही सही आंकड़े सामने आएंगे, आरक्षण का मुद्दा और मजबूती से उठेगा.
अखिलेश यादव ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं की बराबर भागीदारी के बिना सामाजिक क्रांति अधूरी है. उन्होंने कहा कि संस्कार का आरंभ महिला से होता है, अगर महिला जागरूक होगी तो समाज भी जागरूक होगा. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने का काम सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने किया था. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर चुनावी गड़बड़ियों के आरोप भी लगाए और कहा कि वोट काटने जैसी कोशिशों को उनकी पार्टी ने उजागर किया. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं के सम्मान और अधिकार के साथ खड़ी है, लेकिन किसी भी आरक्षण को लागू करने से पहले सही जनगणना, सामाजिक संतुलन और वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना जरूरी है.




