कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर ने स्वयं प्रशिक्षण की निगरानी करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए तैयार किए गए 11 विशेष मॉड्यूल की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण कम करना और प्रारंभिक स्तर पर सीखने की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पढ़ाएंगे शिक्षक
अभियान के तहत अब स्कूलों के शिक्षक सप्ताह में एक दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के साथ समय बिताएंगे और खेल-खेल में उन्हें प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ेंगे। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित होगी, लर्निंग गैप कम होगा तथा वे विद्यालयी शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे। शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच यह समन्वित प्रयास विशेष रूप से ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा उन्नयन
सशक्त आंगनबाड़ी अभियान के तहत पुराने आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन कर उन्हें बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति और भवन निर्माण भी किया जाएगा, जिससे बच्चों और माताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की सदस्य सुश्री दीपिका सोरी ने कहा कि यह अभियान बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों तक पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास से जुड़ी अनेक योजनाओं के माध्यम से माताओं और बच्चों के कल्याण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी
नगर पालिका अध्यक्ष श्री हुंगाराम मरकाम ने बच्चों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों से प्रत्येक बच्चे को अपने परिवार के सदस्य की तरह मार्गदर्शन और स्नेह देने का आह्वान किया। वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों में ही रखी जाती है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कुपोषण मुक्त और शिक्षित सुकमा की दिशा में बड़ा कदम
जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी की गई है। यह अभियान कुपोषण मुक्त, स्वस्थ और शिक्षित सुकमा के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा तथा जिले के हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष दोरनापाल श्रीमती राधा नायक, जनपद पंचायत अध्यक्ष कोंटा श्रीमती कुसुमलता कोवासी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.आर. मंडावी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री शिवदास नेताम, जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री जितेंद्र बघेल, नीति आयोग के प्रतिनिधि श्री सौरभ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।




