2026 में क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल और मिडिल ईस्ट के युद्ध ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक संकट खड़ा कर दिया है. पीएम मोदी ने खुद जनता से वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपनाने, सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है. पिछली बार जब ऐसा माहौल बना था, तब वजह कोविड था. लेकिन इस बार फ्यूल बचाने के लिए ऐसा हो रहा है. यदि ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई और लंबी चलती है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जल्द खुलना मुश्किल लग रहा है. और यदि होर्मुज नहीं खुला तो फिर वह संकट आने के चांस बढ़ जाएंगे, जिसका डर है.
क्या आपको 2020 का वो दौर याद है, जब हम सब घरों में बंद थे? उस वक्त वजह एक वायरस था, लेकिन आज 2026 में हालात कुछ वैसे ही बनते दिख रहे हैं, बस वजह बदल गई है. इस बार विलेन कोरोना नहीं, बल्कि दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और युद्ध हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद की एक सभा में जो बातें कहीं, उन्होंने पूरे देश को चौंका दिया. उन्होंने कहा है कि अब समय आ गया है जब हमें अपनी आदतों को बदलना होगा, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके. यह सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले एक बड़े आर्थिक बदलाव का संकेत है.
10 मई 2026 को सिकंदराबाद में पीएम मोदी ने नागरिकों से ‘देशभक्तिपूर्ण व्यवहार’ में बदलाव लाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमें पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करना चाहिए, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए और जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम (WFH) या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर वापस लौटना चाहिए. इतना ही नहीं, उन्होंने एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने और शादियां भारत के अंदर ही करने की सलाह दी है. उनका कहना है कि जो विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) हम तेल खरीदने में खर्च करते हैं, उसे बचाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है.
इस पूरे संकट की जड़ एक युद्ध है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ का रास्ता बंद हो गया है, जहां से भारत का 54% कच्चा तेल आता है. नतीजा यह हुआ कि जो कच्चा तेल 2025 में 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह मई 2026 तक 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए दुनिया के किसी भी कोने में हुई अशांति सीधे हमारी रसोई और गाड़ी की टंकी पर असर डालती है.




