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ग्लोबल इन्वेस्टर्स का नया ठिकाना बना भारत, पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी कंपनियों ने खोला खजाना

दुनिया जहां एक तरफ व्यापारिक मोर्चे पर जारी खींचतान और पश्चिम एशिया के गहराते संकट जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत में विदेशी निवेश की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस उथल-पुथल के बावजूद वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों और बड़े संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार पर अपना भरोसा जताया है. इस साल के शुरुआती छह महीनों के भीतर ही कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत को केंद्र में रखकर अपने दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स का खुलासा किया है. यह आक्रामक रुख दिखाता है कि वैश्विक मंदी की आहट के बीच भी भारत की मजबूत घरेलू मांग और डिजिटल क्षमता विदेशी पूंजी के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक ठिकाना बनी हुई है.
इन तमाम निवेशों में सबसे बड़ा और ताजा ऐलान दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक अमेजन की ओर से आया है. अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद घोषणा की है कि कंपनी साल 2030 तक भारत में अपने कुल निवेश वादे को बढ़ाकर 48 अरब डॉलर तक ले जाएगी. इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा देश में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर खर्च किया जाएगा. अमेजन से ठीक पहले और भी कई वैश्विक दिग्गजों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग से लेकर अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स के निर्माण के लिए अपनी तिजोरी खोली है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर एक रणनीतिक निवेश हब के रूप में स्थापित कर दिया है.

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