होर्मुज स्ट्रेट से भारत के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. तमाम तनाव और चुनौतियों के बावजूद ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्यात इस जलडमरूमध्य को पार कर कच्चे तेल के साथ एक टैंकर भारत की तरफ बढ़ रहा है. फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) क्षेत्र में जारी तनाव और ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बनाए रखने के बीच यह खबर सामने आई है. इराकी कच्चा तेल लेकर एक स्वेजमैक्स टैंकर के भारत की ओर बढ़ने की खबर सामने आई है. जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार, ‘करोलोस’ नाम का यह टैंकर हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट को पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच गया और अब अरब सागर के रास्ते भारत की ओर बढ़ रहा है. एनर्जी क्राइसिस के मौजूदा समय में भारत के लिए यह बड़ी खुशखबरी है.
ब्लूमबर्ग द्वारा इकट्ठा शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. शुक्रवार को दोनों दिशाओं में केवल पांच जहाजों की आवाजाही दर्ज हुई, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 11 थी. शनिवार सुबह तक इसमें मामूली सुधार देखने को मिला और छह जहाज जलडमरूमध्य से गुजरते दिखाई दिए. पर्शियन गल्फ में जारी संघर्ष अब 12वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. युद्ध से पहले जिस स्तर पर जहाजों की आवाजाही होती थी, मौजूदा ट्रांजिट उससे काफी नीचे बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान जल्द झुक जाएगा, लेकिन अब तक तेहरान की ओर से होर्मुज पर दबाव कम करने के संकेत नहीं मिले हैं. ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता में लौटने से पहले पांच शर्तें रखी हैं. इनमें सबसे प्रमुख शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को स्वीकार करना बताया जा रहा है. यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है.
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