छत्तीसगढ़

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर प्रदेशभर में बाल श्रम उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर प्रदेश में बाल श्रम के उन्मूलन तथा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के समन्वित प्रयासों से आयोजित इस अभियान के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

अभियान के तहत विभिन्न जिलों में होटल, ढाबा, दुकान, प्रतिष्ठान एवं मोटर वाहन गैराजों का निरीक्षण कर संचालकों को बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है तथा इसके लिए दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। अधिकारियों ने व्यवसायियों से बाल श्रम मुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल, जनसंवाद एवं जागरूकता बैठकों के माध्यम से अभिभावकों और ग्रामीणों को बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और समग्र विकास के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि बच्चों का स्थान विद्यालय में है, न कि मजदूरी के कार्यों में। बच्चों को शिक्षा से जोड़कर ही उनके उज्ज्वल भविष्य और समाज के सतत विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

अभियान के दौरान नालसा (बच्चों के लिए बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना-2024 सहित बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों और सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि शासन बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।

इस अवसर पर नागरिकों से अपील की गई कि वे बाल श्रम की किसी भी घटना की जानकारी संबंधित विभागों को दें तथा बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग करें। अभियान का उद्देश्य बाल श्रम के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना और प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं शिक्षाप्रद वातावरण सुनिश्चित करना है।

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