इस आधुनिक तकनीक की खासियत यह है कि इसमें मिट्टी का उपयोग नहीं होता। नारियल बुरादा, परलाईड और वर्मी कोलाईट जैसे माध्यमों से पौध तैयार किए जाते हैं। मशीनरी स्वींग मेथड से बीजों का अंकुरण किया जाता है, जिससे पौधे रोगमुक्त और एक समान वृद्धि वाले बनते हैं। टमाटर, बैंगन, पत्ता गोभी, फूलगोभी, खीरा, करेला, लौकी और कद्दू जैसी सब्जियों की पौध यहां तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस पद्धति से तैयार पौधों की खेत में जीवित रहने की क्षमता अधिक होती है और फसल जल्दी तैयार होती है। यही कारण है कि अब किसान आधुनिक सीडलिंग तकनीक की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। पेण्ड्री की समृद्ध नर्सरी में फलदार, छायादार और सजावटी पौधों की बड़ी श्रृंखला उपलब्ध है। यहां आम, अमरूद, संतरा, आंवला, लीची, अनार, पपीता, नारियल, चीकू और मुनगा जैसे पौधों के साथ अशोक, सिल्वर ओक, कदम और पीपल जैसे वृक्ष भी मिलते हैं। वहीं जरबेरा, रजनीगंधा, कनेर, यूफोर्बिया, एक्जोरा और मनीप्लांट जैसे सजावटी पौधे लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। पेण्ड्री की यह बगिया केवल हरियाली का ठिकाना नहीं, बल्कि किसानों के लिए आधुनिक खेती की प्रयोगशाला बन गई है।




