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S&P 500 में आई बड़ी गिरावट, एशियाई बाजारों में हाहाकार, सोने-चांदी का दाम भी लुढ़का, निवेशक किन फैक्टर्स पर रखें नजर

दुनिया भर के बाजारों में अचानक बेचैनी बढ़ गई है. अमेरिका में शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली है. दक्षिण कोरिया के कोस्पी में करीब 8% तक की गिरावट आई, जबकि जापान का निक्केई भी कारोबार के दौरान 4% से ज्यादा टूट गया. इस हलचल के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ गई है कि क्या बाजार में और गिरावट देखने को मिलेगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने भी बाजार का माहौल बिगाड़ा है.

इस पूरी हलचल के पीछे अमेरिका में महंगाई के उम्मीद से ज्यादा बढ़ने और ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता अहम वजह है. निवेशकों को डर है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला कर सकता है. हालांकि, सोने-चांदी की कीमतों को लेकर तस्वीर मिली-जुली है. ऊंची ब्याज दरों की आशंका इनकी कीमतों पर दबाव डाल सकती है, लेकिन सुरक्षित निवेश की मांग इन्हें सहारा भी दे सकती है. आइए समझते हैं कि रातों-रात बाजार का माहौल क्यों बदला और आगे किन बातों पर नजर रहेगी.

अमेरिका में महंगाई बढ़ने से क्यों बिगड़ा बाजार का मूड?

अमेरिका में सितंबर के उपभोक्ता महंगाई यानी सीपीआई के आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में उपभोक्ता कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 0.6% बढ़ीं. यह अप्रैल के बाद सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी थी. इससे बाजार में यह आशंका मजबूत हुई कि महंगाई को काबू में लाने के लिए फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखनी पड़ सकती हैं या आगे बढ़ानी पड़ सकती हैं.
असल में, ब्याज दरें बढ़ने पर कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है. इससे उनके कारोबार और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है. दूसरी ओर, निवेशकों को कम रिस्क वाले ऑप्शन पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है. ऐसे में वे शेयरों में पैसा लगाने को लेकर सतर्क हो जाते हैं और बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है.

अमेरिकी शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट?

अमेरिकी बाजार में बुधवार के कारोबार के दौरान गिरावट का दबाव साफ दिखाई दिया. S&P 500 इंडेक्स 1.1% गिरकर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में करीब 1.9% की गिरावट दर्ज की गई. छोटी कंपनियों के शेयरों को ट्रैक करने वाला रसेल 2000 इंडेक्स भी करीब 1.9% टूट गया. S&P 500 के लिए यह गिरावट इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे पहले लगातार 53 कारोबारी सेशन तक इसमें एक दिन में 1% की गिरावट नहीं आई थी. जनवरी 2020 के बाद यह इस तरह का सबसे लंबा दौर था. अब यह सिलसिला टूट गया है.
बाजार में इस बदलाव से उन फंडों पर भी असर पड़ा, जो कंप्यूटर आधारित मॉडल के जरिए शेयरों में खरीद-बिक्री करते हैं. बाजार में लंबे समय तक कम उतार-चढ़ाव रहने के कारण ऐसे कई फंड शेयर खरीद रहे थे, लेकिन अचानक आई गिरावट ने उनकी स्ट्रैटजी को प्रभावित किया.

AI और चिप कंपनियों के शेयरों में बिकवाली क्यों बढ़ी?

अमेरिकी बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को लेकर बढ़ती चिंता भी रही. पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी थी. इन कंपनियों के शेयरों में तेजी ने अमेरिकी बाजार को भी मजबूती दी थी. लेकिन अब निवेशक यह सोच रहे हैं कि क्या इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें उनकी कमाई और भविष्य की संभावनाओं के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई हैं.
इसका असर चिप बनाने वाली कंपनियों पर भी दिखाई दिया. सेमीकंडक्टर शेयरों का एक प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स लगातार छठे कारोबारी सेशन में गिरा और इस दौरान इसमें करीब 12% की कमजोरी आई. AI कंपनियों के कारोबार में चिप की अहम भूमिका होती है, इसलिए इस सेक्टर में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
इसके अलावा, जब ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका बढ़ती है, तो निवेशक उन कंपनियों के शेयरों को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य की संभावनाओं पर निर्भर करता है. AI शेयरों में आई बिकवाली को इसी नजरिए से भी देखा जा रहा है.

एशियाई बाजारों में क्यों मचा हाहाकार?

अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर एशिया के शेयर बाजारों पर भी पड़ा. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 8% तक टूट गया. इस गिरावट में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK Hynix जैसी बड़ी चिप कंपनियों के शेयरों की कमजोरी की अहम भूमिका रही. दोनों कंपनियों के शेयरों में 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
जापान का निक्केई 225 इंडेक्स भी कारोबार के दौरान 4% से ज्यादा फिसल गया, जबकि TOPIX इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली. टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों में बिकवाली ने बाजारों पर दबाव बढ़ाया.
दरअसल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है. इसका असर सिर्फ अमेरिकी निवेशकों तक सीमित नहीं है. दुनिया भर के बाजार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. जब अमेरिका जैसे बड़े बाजार में गिरावट आती है, तो दूसरे देशों के निवेशक भी जोखिम कम करने के लिए शेयर बेच सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी बाजार की कमजोरी का असर एशिया में भी देखने को मिला.

सोना-चांदी में क्या हुआ?

शेयर बाजार में गिरावट के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. भारत में चांदी की कीमत 5,000 रुपये गिरकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद सुधार भी देखने को मिला.
सोने और चांदी की कीमतों पर ब्याज दरों का असर पड़ता है. ये ऐसे निवेश हैं जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता. जब ब्याज दरें बढ़ने की आशंका होती है, तो निवेशकों के लिए दूसरे ब्याज देने वाले ऑप्शन ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. इससे सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. दूसरी ओर, बाजार में डर बढ़ने पर कुछ निवेशक सुरक्षित ऑप्शन के तौर पर सोना खरीदना भी पसंद करते हैं.

किन बातों पर रहेगी नजर?

भारत में इन मेटल्स के भाव अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत, टैक्स और घरेलू मांग पर भी निर्भर करते हैं. निवेशकों की नजर अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़ों, उत्पादक महंगाई, खुदरा बिक्री और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर रहेगी. इनसे ब्याज दरों को लेकर आगे की दिशा समझने में मदद मिलेगी. फिलहाल ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है और AI शेयरों की चाल, महंगाई के आंकड़े तथा ब्याज दरों की उम्मीदें बाजार की दिशा तय करने वाले अहम फैक्टर्स रहेंगे.

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