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जिसका डर था वही हुआ, सऊदी में उतरेगी मुनीर की फौज, हूती जंग में पाकिस्तान-तुर्की की एंट्री

यमन में हूती के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो चुकी है. ईरान के कुंभकरण यानी हूती के खिलाफ युद्ध की मुनादी बज चुकी है. हूती और सऊदी समर्थित यमनी सेना के बीच जंग में मक्का डिफेंस पैक्ट एक्टिव हो चुका है. अब पाकिस्तान-तुर्की की एंट्री हो गई है. सऊदी अरब में भेजे पाकिस्तान के सैनिक भेजे जाएंगे. जी हां, मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट (संयुक्त रक्षा समझौता) के तहत पाकिस्तान और तुर्की सऊदी अरब में तेजी से सैनिक तैनात करेंगे. यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब यमन के हूती विद्रोहियों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं.
यह फैसला सोमवार को रियाद में हुई एक इमरजेंसी मीटिंग के बाद लिया गया. सोमवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में तीनों देशों के सीनियर अधिकारियों की आपात बैठक हुई. इसमें पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
बैठक के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया. इसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने कहा कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा और उसकी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी हमले या धमकी को पूरी तरह खारिज करते हैं. तीनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि सामूहिक रक्षा से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को अब तुरंत जमीन पर लागू किया जाएगा. इसके लिए जरूरी सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराई जाएंगी और उन्हें सऊदी अरब में तेजी से तैनात किया जाएगा.
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच यह आपसी रक्षा समझौता अगस्त में हुआ था. इसके तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो बाकी दोनों देश उसकी मदद करेंगे. यह समझौता खास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें तीन बड़ी सैन्य ताकतें शामिल हैं. तुर्की के पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है. पाकिस्तान मुस्लिम दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश है, जबकि सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र की एक बड़ी और प्रभावशाली शक्ति है.
कितने सैनिक जाएंगे, भूमिका क्या होगी?
फिलहाल यह साफ नहीं किया गया है कि पाकिस्तान और तुर्की कितने सैनिक सऊदी अरब भेजेंगे. यह भी स्पष्ट नहीं है कि वहां पहुंचने के बाद इन सैनिकों की जिम्मेदारी क्या होगी. हालांकि, तीनों देशों ने कहा है कि वे तय सैन्य बल और जरूरी क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाएंगे और उन्हें सऊदी अरब में तेजी से तैनात किया जाएगा.
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है. हूती लड़ाके सऊदी अरब के शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री रास्तों को निशाना बनाते रहे हैं. यमन में लड़ाई फिर तेज होने के बाद इन हमलों में भी बढ़ोतरी हुई है.
यमन में भी बढ़ा तनाव
पिछले कुछ महीनों में यमन की सुरक्षा स्थिति भी खराब हुई है. सितंबर में हूतियों ने बड़ा सैन्य अभियान चलाकर यमन की सऊदी समर्थित सरकार के कब्जे वाले कई बड़े इलाकों पर नियंत्रण कर लिया था. इसके जवाब में सऊदी अरब समर्थित बलों ने सोमवार को पलटवार शुरू किया. उनका लक्ष्य हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस हासिल करना है. इनमें कुछ ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन पर हूतियों का एक दशक से ज्यादा समय से नियंत्रण रहा है.
यमन में सऊदी का काउंटर अटैक
इस बीच यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के कई महत्वपूर्ण इलाकों को फिर से अपने नियंत्रण में कर लिया है. यमनी अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ मिलकर लड़ रहीं सेनाओं ने जलडमरूमध्य के ठीक उत्तर में स्थित महत्वपूर्ण शहर धुबाब को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया है. अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बाब और हदीद शहरों को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है. सरकार की यह कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू किए गए एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा थी। इस अभियान में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हवाई सहायता दी.

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